सूर्य ग्रहण के 15 दिन बाद लगेगा चंद्र ग्रहण 2026, जानें भारत में दिखाई देगा या नहीं
28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण 2026 लगेगा। जानें ग्रहण का समय, भारत में दृश्यता, सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं।
चंद्र ग्रहण 2026: अगस्त 2026 में आसमान में दो ग्रहण देखने को मिलेंगे। 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण के बाद अब 28 अगस्त को साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगेगा। यानी सूर्य ग्रहण के ठीक 16 दिन बाद खगोलीय घटना के तौर पर यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। NASA के अनुसार 28 अगस्त 2026 का ग्रहण आंशिक चंद्र ग्रहण है और इसकी दृश्यता अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका तथा पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में रहेगी।
ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि चंद्र ग्रहण 2026 भारत में दिखाई देगा या नहीं। साथ ही लोग इसके समय, सूतक काल और धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी जानकारी तलाश रहे हैं। आइए जानते हैं इस ग्रहण से जुड़ी जरूरी बातें।
चंद्र ग्रहण 2026 कब लगेगा?
साल 2026 का यह आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा। NASA के खगोलीय आंकड़ों के मुताबिक ग्रहण का मुख्य चरण 04:14 UTC के आसपास होगा, जो भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 9:44 बजे पड़ता है। आंशिक ग्रहण का चरण लगभग 3 घंटे 18 मिनट तक रहेगा।
वहीं, पूरे ग्रहण की अवधि यानी पेनुम्ब्रा समेत घटना इससे अधिक समय तक चलती है। अलग-अलग स्थानों पर ग्रहण के शुरू और खत्म होने का स्थानीय समय अलग हो सकता है।
क्या भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण 2026?
नहीं। चंद्र ग्रहण 2026 का 28 अगस्त वाला आंशिक ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। NASA की जानकारी के अनुसार इसकी दृश्यता अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों तक सीमित रहेगी। भारत इस ग्रहण के दृश्यता क्षेत्र में शामिल नहीं है।
इसका मतलब यह है कि भारत में रहने वाले लोग इसे सीधे आसमान में नहीं देख पाएंगे। इसलिए भारत में इस खगोलीय घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर ग्रहण देखने की स्थिति नहीं बनेगी।
क्या चंद्र ग्रहण का सूतक काल लगेगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से पहले सूतक काल की परंपरा मानी जाती है। आम तौर पर चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक शुरू होने की मान्यता है। हालांकि, धार्मिक परंपराओं में यह भी माना जाता है कि जो ग्रहण किसी स्थान से दिखाई नहीं देता, वहां सूतक मान्य नहीं होता।
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इसलिए भारत में 28 अगस्त के ग्रहण के दिखाई न देने के कारण धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा। हालांकि, अलग-अलग पंचांग और परंपराओं में नियमों को लेकर अंतर हो सकता है।
आंशिक चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?
आंशिक चंद्र ग्रहण उस समय होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, लेकिन चंद्रमा का पूरा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी अंब्रा में प्रवेश नहीं करता। इसके कारण चंद्रमा का केवल एक हिस्सा अंधकारमय दिखाई देता है। NASA भी आंशिक चंद्र ग्रहण को ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित करता है, जिसमें चंद्रमा पृथ्वी की छाया के केवल एक हिस्से से गुजरता है।
यही कारण है कि पूर्ण चंद्र ग्रहण की तरह पूरा चंद्रमा लाल या गहरे रंग का नहीं दिखाई देता। आंशिक ग्रहण में चंद्रमा के एक हिस्से पर पृथ्वी की छाया नजर आती है।
ग्रहण के दौरान क्या करने की मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण की अवधि को पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान लोग भगवान का स्मरण, चंद्र मंत्र, गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करने की भी परंपरा है।
हालांकि, ये धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं हैं। इनके वैज्ञानिक प्रभाव का कोई प्रमाण नहीं है। भारत में यह ग्रहण दिखाई भी नहीं देगा, इसलिए यहां सामान्य दैनिक गतिविधियों पर वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता।
12 अगस्त के सूर्य ग्रहण से कितना अलग है यह ग्रहण?
12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण हुआ, जबकि 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। NASA के अनुसार 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण कुल सूर्य ग्रहण था, जिसकी पूर्णता का मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से होकर गुजरा।
वहीं, 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण 2026 आंशिक है और इसकी दृश्यता का क्षेत्र अलग रहेगा। इस तरह अगस्त में दो अलग-अलग प्रकार के ग्रहण होने जा रहे हैं, लेकिन दोनों को भारत से देखने की स्थिति एक जैसी नहीं है।
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