40% अनिवार्य अंकों के मामले में चैतर वसावा ने गुजरात गौण सेवा चयन मंडल के अध्यक्ष को आवेदन पत्र दिया

संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन, तलाटी भर्ती में ST उम्मीदवारों के लिए छूट की मांग : चैतर वसावा

आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा ने गुजरात गौण सेवा चयन मंडल के अध्यक्ष को आवेदन पत्र दिया था। हाल ही में गुजरात गौण सेवा चयन मंडल द्वारा आयोजित रेवेन्यू तलाटी भर्ती प्रक्रिया में आदिवासी (अनुसूचित जनजाति – ST) उम्मीदवारों के लिए प्रत्येक पेपर में 40 प्रतिशत अनिवार्य न्यूनतम अंक तय किए गए हैं, जो संवैधानिक प्रावधानों और आरक्षण नीति के विरुद्ध हैं, यह बताते हुए आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा ने गुजरात गौण सेवा चयन मंडल के अध्यक्ष को पत्र लिखकर प्रस्तुति दी है। उन्होंने बताया है कि हाल ही में लगभग 2389 रेवेन्यू तलाटी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। जिसमें गुजराती और अंग्रेजी विषय में आदिवासी उम्मीदवारों के लिए 40 प्रतिशत न्यूनतम अंक अनिवार्य रखे गए थे, तथा 150 अंकों के पेपर में 60 अंक अनिवार्य तय किए गए थे। प्रत्येक पेपर में समान रूप से 40 प्रतिशत न्यूनतम अंक अनिवार्य रखने का निर्णय भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(4) तथा अनुच्छेद 335 सहित आरक्षण से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करता है। आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के लिए एक जैसे मानदंड तय नहीं किए जा सकते, क्योंकि पूरे देश में भर्ती प्रक्रियाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उम्मीदवारों को न्यूनतम अंकों में छूट दी जाती है।

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विधायक चैतर वसावा ने प्रस्तुति में आगे कहा है कि इस प्रकार के कठोर मानदंडों के कारण आदिवासी क्षेत्रों के कई प्रतिभाशाली उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर रह जाने की आशंका है, जो उनकी सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति को देखते हुए स्पष्ट अन्याय है। उन्होंने मांग की है कि रेवेन्यू तलाटी भर्ती विज्ञापन क्रमांक 301 के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति उम्मीदवारों का परिणाम सामान्य उम्मीदवारों से अलग तरीके से तैयार किया जाए और सभी पेपरों में न्यूनतम अंकों की सीमा में उचित छूट देकर न्याय किया जाए। विधायक चैतर वसावा ने उल्लेख किया कि पहले भी गुजरात लोक रक्षक भर्ती प्रक्रिया में ST उम्मीदवार अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रह गए थे, जिसका पुनरावर्तन न हो, यह आवश्यक है। यदि इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल उचित निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य का आदिवासी समाज अपने हक और न्याय के लिए न्यायिक मार्ग या राज्यव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन का मार्ग अपनाने को मजबूर होगा। विधायक चैतर वसावा ने प्रस्तुति करते हुए कहा था कि 1. न्यूनतम अंकों का मानदंड आदिवासी उम्मीदवारों के लिए नरम बनाया जाना चाहिए, या हटा ही दिया जाना चाहिए, 2. प्रशिक्षण और ओरिएंटेशन कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए ताकि चयनित उम्मीदवारों को नौकरी से पहले पर्याप्त मार्गदर्शन मिल सके। 3. आरक्षण का अर्थ ‘खाली सीट’ नहीं बल्कि ‘अवसर की समानता’ है, यह समझना आवश्यक है।

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