एएनआई: केन्द्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को सूचित किया कि मराठी को शास्त्रीय भाषा बनाने के लिए मंत्रालय विचार कर रहा है सकारात्मक परिणाम जल्द ही सामने आएगा।

संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी एक सवाल का जवाब देते हुए यह घोषणा की है।

बता दें कि प्रश्नकाल के दौरान शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाया था कि मराठी को अभी तक शास्त्रीय भाषा का दर्जा क्यों नहीं दिया गया, तो इसके जवाब में संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जवाब देते हुए बताया कि, मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा बनाने के लिए जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आने वाला है। सरकार ने बताया कि मंत्रालय की एक समिति इस पर विचार कर रही है।

मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के लिए पहली बार महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को सूचित करके आवेदन दिया है। मेघवाल ने कहा कि, संस्कृति मंत्रालय को गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के काम के लिए अधिकृत किया गया है।उन्होंने सदन को बताया, “मंत्रालय ने एक भाषा विज्ञान विशेषज्ञ समिति का गठन किया है और यह मामला साहित्य अकादमी के पास गया है और बहुत सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रहा है। बता दें कि मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा बनाने के लिए महाराष्ट्र की विधानपालिका के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र से मराठी को ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा देने के लिए अनुरोध किया गया था।

यह पूछे जाने पर कि यह इतने लंबे समय से क्यों लंबित है, उन्होंने कहा कि इसमें समय लगता है जब एक अंतर-मंत्रालयी चर्चा होती है और संस्कृति, गृह और शिक्षा मंत्रालय शामिल होते हैं।

बता दें कि,भारत में छह भाषाओं अर्थात् तमिल, तेलुगु, संस्कृत, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है। शास्त्रीय घोषित की गई भाषाओं के अध्ययन के लिए केंद्र स्थापित किये जाते हैं तथा उनके विद्वानों के लिए अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं, इसके अलावा शास्त्रीय भाषाओँ को कई अन्य लाभ भी प्राप्त होते हैं।