दिल्ली की बिजली व्यवस्था मजबूत बनाने पर खर्च होंगे 17,000 करोड़, CM ने पेश किया रोडमैप

दिल्ली सरकार अगले तीन साल में बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए ₹17,000 करोड़ निवेश करेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भरोसेमंद, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बिजली वितरण का रोडमैप पेश किया।

दिल्ली की बिजली व्यवस्था को भविष्य के लिए भरोसेमंद और टिकाऊ बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने 17,000 करोड़ रुपये की महत्त्वाकांक्षी योजना पेश की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में बिजली वितरण, ट्रांसमिशन और सोलर ऊर्जा परियोजनाओं का रोडमैप तैयार किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी के लिए विकसित, आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बिजली तंत्र बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार अगले तीन वर्षों में नई ट्रांसमिशन लाइनें, ग्रिड सबस्टेशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत करेगी। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्मी के पीक सीजन में भी जनता को बिना कटौती और फॉल्ट के उच्च गुणवत्ता वाली बिजली मिले।

बढ़ती बिजली मांग और भविष्य की तैयारी

साल 2025 में दिल्ली की अधिकतम बिजली मांग लगभग 8,400 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, बढ़ती आबादी, एसी और अन्य उपकरणों का अधिक उपयोग, और इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण हर साल बिजली की मांग 4 से 5 फीसदी बढ़ रही है। अनुमान है कि साल 2030 तक पीक डिमांड 11,500-12,000 मेगावाट और 2040 तक 19,000-20,000 मेगावाट तक पहुंच सकती है।

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मुख्यमंत्री ने इस बढ़ती मांग को चुनौती नहीं बल्कि अवसर बताया। उन्होंने कहा कि पहले से तैयार रहकर ही दिल्ली को भविष्य में बिजली संकट से बचाया जा सकता है।

सौर ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा पहल

बैठक में सौर ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को तेजी से लागू किया जाएगा और सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इसके अलावा, कृषि भूमि और अनुपयोगी जमीन पर भी सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया आसान होगी। फ्लाईओवरों और अन्य उपयुक्त जगहों पर बिजली वितरण से जुड़ी संरचनाएं स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए।

सबसे एडवांस तकनीक का इस्तेमाल

मुख्यमंत्री ने डीटीएल और सभी डिस्कॉम को निर्देश दिए कि फॉल्ट की स्थिति में बिजली बहाली तेज हो और अंतिम उपभोक्ता तक बिजली की आपूर्ति और गुणवत्ता सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य केवल आज की जरूरतें पूरी करना नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भरोसेमंद, टिकाऊ और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली व्यवस्था तैयार करना है।

दिल्ली सरकार की इस योजना से राजधानी के हर क्षेत्र में बिजली वितरण सुधरेगा, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटेगी।

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