भारत के कर्नाटक राज्य से शुरू हुआ हिजाब विवाद ( hijab controversy)अभी सुलझने का नाम नहीं ले रहा है. बल्कि बजाए सुलझने के ये और अधिक बढ़ता जा रहा है. हिजाब देशभर में एक चर्चा का विषय बन गया है. देश का एक गुट जहां स्कूल और शिक्षण संस्थानों में हिजाब ( Hijab in school and educational institutions)की पैरवी कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसको पूरी तरह से गलत ठहरा रहा है. इस बीच हिजाब विवाद को सुलझाने के लिए गठित तीन न्यायाधीशों की कर्नाटक हाईकोर्ट ( Karnataka High Court) की पीठ ने मामले की सुनवाई की. कोर्ट में सुुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को लीड कर रहे अधिवक्ता रवि वर्मा ने कहा कि केवल हिजाब का ही जिक्र क्यों है, जब क्रास, पगड़ी और बिंदी जैसे अनेकों धार्मिक प्रतीक चिन्ह लोगों द्वारा रोजाना पहने जाते हैं.

मुस्लिम लड़कियों के साथ भेदभाव विशुद्ध रूप से उनके धर्म पर आधारित

अधिवक्ता रवि वर्मा ने कोर्ट को बताया कि सरकारी आदेश में किसी अन्य धार्मिक प्रतीक पर विचार नहीं किया जाता है, केवल हिजाब ही क्यों? उन्होंने कहा कि मुस्लिम लड़कियों के साथ भेदभाव विशुद्ध रूप से उनके धर्म पर आधारित है. उन्होंने आगे कहा कि सैकड़ों धार्मिक प्रतीक हैं और सरकार केवल हिजाब को ही क्यों चुन रही है? वरिष्ठ वकील कुमार ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि हिंदुओं और सिखों के अपने-अपने धार्मिक प्रतीक हैं, फिर इन गरीब मुस्लिम लड़कियों को ही क्यों चुन रहे हैं? क्या यह उनके धर्म के कारण नहीं है?

हिज़ाब को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए

वहीं, असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा ( Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma)ने कहा कि हिज़ाब को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। आज शिक्षा पीछे चली गई है और हिज़ाब आगे चला गया है। लोगों ने माहौल बना दिया है कि शिक्षा से ज़्यादा ज़रुरी हिज़ाब है.