राधा अष्टमी व्रत करने के नियम और विधि क्या है?
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राधा अष्टमी का त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह उत्सव हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आता है।
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ऐसी मान्यता है कि इसी दिन वृंदावन की श्री राधा रानी, जो श्रीकृष्ण की प्रिया हैं, का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह त्योहार 5 सितंबर को मनाया जाएगा।
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राधा अष्टमी पर राधा रानी की विशेष आराधना और व्रत का खास महत्व होता है। हालांकि, व्रत के सही नियम और प्रक्रिया जानना बहुत जरूरी है।
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मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से प्रेम, सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
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राधा रानी को भक्ति, प्रेम और त्याग की symbol माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा से जीवन में खुशियां और सकारात्मकता आती है।
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राधा अष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर व्रत का संकल्प लें।
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पूरा दिन शुद्धता बनाए रखें, गुस्से और कड़वे शब्दों से बचें। व्रत में अनाज व नमक त्यागें और केवल फलाहार करें।
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पूजा के दौरान राधा रानी के मंत्र “ॐ ह्रीं राधिकायै नमः” का जप करना बहुत शुभ होता है।
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इसके साथ ही आप श्री राधा स्तोत्र या राधा-कृष्ण के भजन भी पढ़ सकते हैं, जिससे मन में शांति और भक्ति बढ़ती है।