25 जनवरी, 2011 को पहली बार राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी। तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अधिक युवा मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने आशय के साथ कानून मंत्रालय के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने उस समय बताया था कि 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले नए वोटर्स मतदाता सूची में नामांकित होने में कम रुचि दिखा रहे थे। यही कारण था कि इस मुद्दे को हल करने के लिए चुनाव आयोग ने पूरे भारत के सभी मतदान केंद्रों में प्रत्येक साल 1 जनवरी को 18 वर्ष की आयु तक पहुंचने वाले सभी पात्र मतदाताओं की पहचान करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी प्रयास शुरू करने का फैसला किया थां। इसके बाद निर्णय लिया गया कि मतदाताओं का नामांकन किया जाएगा और उन्हें हर साल 25 जनवरी को चुनावी फोटो पहचान पत्र ;ईपीआईसी दिया जाएगा।

इस साल की थीम
इस साल के राष्ट्रीय मतदाता दिवस की थीम चुनावों को समावेशी, सुगम और सहभागी बनाना है। एक मतदाता को कई अधिकार प्राप्त होते हैं। कुछ लोगों को इनकी पूरी जानकारी नहीं होती है। इसलिए इन अधिकारो को जानना भी जरूरी है।

रजिस्टर्ड वोटर को 18 वर्ष के बाद मतदान का अधिकार
मतदान का अधिकार देश में 18 वर्ष के बाद वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हर व्यक्ति को वोट देने का अधिकार है। किसी भी मतदाता को धर्म, जाति, वर्ण, संप्रदाय या लिंग के आधार पर मतदान से वंचित नहीं किया जा सकता है।

वोटर उम्मीदवारों की मांग सकते हैं जानकारी
वोटर को चुनावी मैदान में उतरने वाले कैंडिडेट्स से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। मतदाता प्रत्याशी के एसेट, आपराधिक रिकॉर्ड, शैक्षणिक योग्यता की जानकारी ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक फैसले में स्पष्ट कहा है कि किसी प्रत्याशी की शैक्षणिक योग्यता जानना मतदाता का मौलिक अधिकार है।

किसी को भी वोट नहीं देने का अधिकार
वोटर्स को अगर उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वह अपनी नापसंद जाहिर भी कर सकता है। जिसके लिए मतादाता नोटा के जरिए किसी भी प्रत्याशी को न चुनने का अधिकार इस्तेमाल कर सकते हैं।

जानें पर्यटन दिवस का महत्व
भारत में, पर्यटन सबसे बड़े आय वाले उद्योगों में से एक है और देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संस्कृति को जीवित रखने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हम 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाते हैं। हर साल इस दिन के लिए एक नई थीम चुनी जाती है। यह दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पर्यटन के महत्व और इसके आर्थिक पहलुओं के बारे में जागरूकता पैदा करता है।

जानें इतिहास
साल 1958 में, सरकार को भारत की ओर आने वाले पर्यटन यातायात के महत्व का एहसास हुआ और उन्होंने पर्यटन का एक अलग विभाग बनाया। विभाग बनाने का उद्देश्य हमारी राष्ट्रीय विरासत को संरक्षित करना और पर्यटन स्थलों को पर्यटन के अनुकूल बनाते हुए उनकी सुंदरता को बरकरार रखने के लिए उनकी देखभाल करना था।

राष्ट्रीय पर्यटन दिवस का थीम

इस साल, आंध्र प्रदेश में यह दिवस आजादी का अमृत महोत्सव विषय पर मना रहा है। भारत सरकार ने देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस को चिह्नित करने के लिए आजादी का अमृत महोत्सव अभियान शुरू किया। भारत में कई ऐतिहासिक स्थल हैं जो बलिदान, रक्तपात, देशभक्ति और स्वतंत्रता की कहानी बयां क रते हैं।