सतुआन पर्व 2026: कब है सतुआ संक्रांति, जानें सही तारीख, पूजा विधि, मुहूर्त और दान का महत्व
सतुआन पर्व 2026: जानें सही तारीख, पूजा विधि, मुहूर्त और दान सामग्री से जुड़ी पूरी जानकारी।
सतुआन पर्व, जिसे सतुआनी और सतुआ संक्रांति भी कहा जाता है, उत्तर भारत का एक प्रमुख पारंपरिक पर्व है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। इस साल लोग जानना चाहते हैं कि सतुआन पर्व 2026 कब है और इसकी सही पूजा विधि क्या है।
सतुआन पर्व 2026 की सही तारीख
पंचांग के अनुसार, सतुआन पर्व 2026 14 अप्रैल 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह पर्व मेष संक्रांति के साथ ही मनाया जाता है, जब सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इसलिए सतुआन पर्व 2026 का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है।
सतुआन पर्व 2026 का मुहूर्त
सतुआन पर्व 2026 के शुभ समय इस प्रकार हैं:
पुण्य काल: 05:57 AM से 01:55 PM
संक्रांति क्षण: 09:39 AM
इस समय सूर्य पूजा, स्नान और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए सतुआन पर्व 2026 में इन मुहूर्तों का विशेष ध्यान रखा जाता है।
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सतुआन पर्व 2026 की पूजा विधि
सतुआन पर्व 2026 के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और सूर्य देव को जल अर्घ्य देते हैं। एक दिन पहले मिट्टी के घड़े में जल भरकर रखा जाता है, जिसे अगले दिन पूरे घर में छिड़का जाता है।
इसके बाद घर में शुद्ध भोजन जैसे सत्तू, कच्चा आम और गुड़ का सेवन किया जाता है। कई जगहों पर बासी भोजन करने की परंपरा भी निभाई जाती है। सतुआन पर्व 2026 पर यह परंपरा शरीर को गर्मी से बचाने और स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सतुआन पर्व का महत्व
सतुआन पर्व को गर्मी के मौसम की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन से खरमास समाप्त होता है और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। यह पर्व शरीर और प्रकृति दोनों के संतुलन को दर्शाता है।
लोग इस दिन ठंडी तासीर वाले भोजन जैसे सत्तू, गुड़, कच्चा आम और मूली का सेवन करते हैं। सतुआन पर्व स्वास्थ्य और परंपरा दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
सतुआन पर्व में दान का महत्व
सतुआन पर्व के दिन दान का विशेष महत्व होता है। लोग मिट्टी का नया घड़ा, सत्तू, गुड़, पंखा, चप्पल और छाता दान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है।
घड़े में जल भरकर उसकी पूजा करने के बाद दान करने की परंपरा विशेष पुण्यदायी मानी जाती है। सतुआन पर्व पर दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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