क्या राघव चड्ढा और बीजेपी के बीच हुई गुप्त डील? जानिए अनुराग ढांडा ने डॉ. अशोक मित्तल पर हुई ED रेड और राघव चड्ढा की भूमिका पर क्या बड़े खुलासे किए हैं।
आज देश की राजनीति में एक बड़ा सवाल तैर रहा है—क्या राघव चड्ढा ने बीजेपी के साथ मिलकर अपनी ही पार्टी के सहयोगियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है? पिछले कुछ दिनों से मीडिया और राजनीतिक हल्कों में यह चर्चा आम है कि राघव चड्ढा की बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ गुप्त बैठकें हुई हैं। अनुराग ढांडा के बयानों और पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों को देखें तो यह मामला केवल ‘भ्रष्टाचार की जांच’ तक सीमित नहीं लगता।
अशोक मित्तल पर छापेमारी: महज संयोग या सोची-समझी साज़िश?
डॉ. अशोक मित्तल, जिन्हें हाल ही में राज्यसभा में राघव चड्ढा की जगह उप-नेता (Deputy Leader) बनाया गया था, अचानक ED के रडार पर आ गए हैं। अनुराग ढांडा और सौरभ भारद्वाज जैसे नेताओं ने सीधे तौर पर संकेत दिया है कि जब से पार्टी ने राघव को उनके पद से हटाया है, तब से बदले की भावना से यह खेल खेला जा रहा है। AAP नेताओं का आरोप है कि राघव चड्ढा को केंद्र सरकार द्वारा Z+ सुरक्षा देना और फिर तुरंत बाद अशोक मित्तल पर रेड पड़ना, इस ‘जुगलबंदी’ की ओर साफ इशारा करता है।
Is Raghav Chaddha behind these ED raids on AAP MP Dr Ashok Mittal?
Many Journalists confirmed in personal conversation about having source based info of Raghav meeting BJP top leadership recently but their respective media organisations are not running this news.
Our media run… pic.twitter.com/dgjmVO2hId
— Anurag Dhanda (@anuragdhanda) April 15, 2026
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अनुराग ढांडा का तीखा हमला: ‘डर गए हैं राघव’
आम आदमी पार्टी के फायरब्रांड नेता अनुराग ढांडा ने राघव चड्ढा पर हमला बोलते हुए कहा कि वे अब “केजरीवाल के सिपाही” नहीं रहे। ढांडा के अनुसार, राघव संसद में मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से कतरा रहे हैं और पार्टी के बजाय अपने व्यक्तिगत हितों और बीजेपी के साथ तालमेल बैठाने में जुटे हैं। ढांडा ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा की बीजेपी से नजदीकी ही वह कारण है जिसके चलते मीडिया का एक बड़ा हिस्सा उनके खिलाफ खबरें चलाने से डर रहा है।
मीडिया का दोहरा रवैया और ‘सोर्स आधारित’ खबरें
आपकी बात में दम है कि भारतीय मीडिया अक्सर पाकिस्तान या अमेरिका की खबरों पर “सूत्रों के हवाले से” लंबी चर्चाएं करता है, लेकिन जब बात राघव चड्ढा और बीजेपी की गुप्त मुलाकातों की आती है, तो एक रहस्यमयी चुप्पी साध ली जाती है। अनुराग ढांडा का भी यही मानना है कि पत्रकारों के पास पुख्ता जानकारी होने के बावजूद, सत्ता के दबाव में इस खबर को दबाया जा रहा है।
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