राज्यदिल्ली

राघव चड्ढा का AAP से इस्तीफा: संजय सिंह ने दागे तीखे सवाल

AAP नेता राघव चड्ढा के भाजपा में शामिल होने पर संजय सिंह ने बोला हमला। जानें क्यों सात सांसदों ने छोड़ी पार्टी और क्या है भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’। पूरी खबर यहाँ।

जैसे ही राघव चड्ढा ने AAP के सात राज्यसभा सांसदों के साथ भाजपा में शामिल होने की घोषणा की, संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने का आरोप लगाया। संजय सिंह ने कहा कि यह पंजाब की जनता के साथ बड़ी गद्दारी है।

संजय सिंह के बयान की मुख्य बातें:

गद्दारी का आरोप: संजय सिंह ने कहा कि राघव चड्ढा और अन्य 6 सांसदों ने पंजाब की जनता के भरोसे को तोड़ा है। उन्होंने इसे “धोखेबाजी” करार दिया जिसके लिए जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।

ऑपरेशन लोटस का घिनौना खेल: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने ईडी (ED) और अन्य एजेंसियों का डर दिखाकर आप के सांसदों को तोड़ा है। यह ‘ऑपरेशन लोटस’ का सबसे घिनौना चेहरा है।

एजेंसियों का दुरुपयोग: संजय सिंह ने हाल ही में अशोक मित्तल के घर पर हुई ईडी की छापेमारी का जिक्र करते हुए कहा कि सांसदों को जेल भेजने का डर दिखाकर पाला बदलने पर मजबूर किया गया है।

पंजाब सरकार के खिलाफ साजिश: उन्होंने कहा कि यह सब भगवंत मान सरकार के अच्छे कामों को रोकने और सरकार को अस्थिर करने की एक बड़ी साजिश है।

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किन सांसदों ने छोड़ा साथ?

राघव चड्ढा के साथ जिन अन्य राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने की खबरें हैं, उनमें शामिल हैं:

  • संदीप पाठक
  • अशोक मित्तल
  • हरभजन सिंह
  • स्वाति मालीवाल
  • राजेंद्र गुप्ता
  • विक्रम साहनी

इन सांसदों के जाने से राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ताकत काफी कम हो गई है, जिसे संजय सिंह ने पार्टी के लिए एक चुनौती नहीं बल्कि “गद्दारों की छंटनी” बताया है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

राघव चड्ढा का जाना आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद और पार्टी के युवा चेहरे माने जाते थे। राघव चड्ढा ने अपने बयान में कहा कि वे राज्यसभा में अपनी सदस्यता बचाने के लिए “संवैधानिक विलय” (Merger) का रास्ता अपना रहे हैं, क्योंकि उनके पास कुल सांसदों का दो-तिहाई बहुमत है।

संजय सिंह ने अंत में चेतावनी देते हुए कहा, “पंजाब के लोग इन सातों सांसदों के नाम याद रखेंगे। वक्त आने पर जनता वोट की चोट से इस धोखे का जवाब देगी।” इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब और दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है।

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