ED छापेमारी विवाद में AAP ने जांच एजेंसियों पर उठाए सवाल, मनीष सिसोदिया ने राजनीतिक पक्षपात और भ्रामक मीडिया रिपोर्टिंग का आरोप लगाया।
दिल्ली की सियासत में एक बार फिर गरमाहट देखने को मिल रही है, जहां ED छापेमारी विवाद लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी का आरोप है कि जांच प्रक्रिया में निष्पक्षता की कमी दिख रही है।
जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
ED छापेमारी विवाद को लेकर AAP नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ED ने एक ऐसे बिल्डर के ठिकाने पर छापेमारी की, जो कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चंदा देता रहा है। इसके बाद मीडिया के एक हिस्से द्वारा मामले को गलत तरीके से पेश कर AAP मंत्री का नाम जोड़ने की कोशिश की गई, जिसे उन्होंने पूरी तरह भ्रामक बताया।
ED वाले अफसरों ने छापा मारा बीजेपी को चंदा देने वाले बिल्डर के घर… शायद बीजेपी को उससे और चंदा लेना होगा, लेकिन बाद में ED ने एक झूँठ पकाया और AAP के एक मंत्री का नाम जोड़ दिया, … और शर्मनाक तो यह कि ED का दिया हुआ झूँठ, बेशर्म गोदी मीडिया ने जमकर चलाया। https://t.co/drQaXqh2Jo
— Manish Sisodia (@msisodia) May 8, 2026
also read:- पंजाब ब्लास्ट पर संजय सिंह का BJP पर हमला, बोले- ‘नफरत…
AAP का मीडिया और एजेंसियों पर निशाना
पार्टी का कहना है कि ED छापेमारी विवाद के दौरान कुछ मीडिया चैनलों ने बिना किसी ठोस सबूत के गलत जानकारी प्रसारित की, जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। AAP ने इसे “नैरेटिव सेट करने की कोशिश” बताते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। मनीष सिसोदिया ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
ED छापेमारी विवाद अब केवल जांच एजेंसी की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। AAP का आरोप है कि इस पूरे मामले को जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, जबकि सच्चाई को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
पारदर्शिता की मांग
ED छापेमारी विवाद के बीच मनीष सिसोदिया ने स्पष्ट रूप से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करें तो लोकतंत्र मजबूत होगा, लेकिन यदि उन पर राजनीतिक दबाव डाला जाता है तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। फिलहाल इस मामले पर संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
For English News: http://newz24india.in
Visit WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb4ZuKSLSmbVWNb1sx1x



