राजू करपडा के इस्तीफे के मुद्दे पर AAP नेता प्रवीण राम का बड़ा खुलासा

जेल में भी राजुभाई अपने दो पुराने मामलों को लेकर चिंतित थे: प्रवीण राम

राजू करपडा के इस्तीफे के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी फ्रंटल संगठन प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण राम ने कहा कि 108 दिनों की जेल हमने साथ में काटी है। हम भावनगर और उसके बाद राजकोट जेल में थे। राजुभाई करपडा ने इस्तीफा दिया है और उस इस्तीफे के पीछे का सटीक और वास्तविक कारण यह है कि जब राजुभाई 108 दिन मेरे साथ जेल में थे, तब भी वे कई बार मुझसे चर्चा करते थे। वे एक चिंता में थे, अपने दो पुराने मामलों को लेकर। उनके ऊपर धारा 307 के दो मामले हैं। एक मामला 2015 का है और उसके बाद दूसरा मामला दर्ज हुआ है। इन दोनों मामलों को लेकर वे बार-बार चिंतित रहते थे।

एक मामले में उन्हें सुरेंद्रनगर कोर्ट द्वारा पांच वर्ष की सजा सुनाई गई है। दूसरा मामला निर्णय पर था। दूसरे मामले में उनके परिवार के चार से पांच सदस्य भी शामिल थे। जब वे जेल में थे तब कई बार मुझसे चर्चा कर चिंता व्यक्त करते थे कि इस मामले में मुझे सजा होगी, दूसरे निर्णय में भी मुझे सजा होगी और मैं चुनाव नहीं लड़ पाऊंगा। भाजपा ने उनके इन दोनों पुराने मामलों को लेकर उनके ऊपर डर पैदा किया, दबाव बनाने का प्रयास किया और उन्हें तोड़ने की कोशिश की। इन दोनों मामलों के कारण दोबारा जेल न जाना पड़े और चुनाव लड़ने की स्थिति न बने, इस डर के कारण कहीं न कहीं राजुभाई ने इस्तीफा दिया है। यही वास्तविक कारण है।

also read:- AAP विधायक चैतर वसावा का राजू करपडा के इस्तीफे के मुद्दे पर बयान

AAP नेता प्रवीण राम ने आगे कहा कि राजुभाई करपडा किस पार्टी में शामिल होते हैं, यह जल्द ही आप सभी को पता चल जाएगा। लेकिन तर्क के साथ कहूं तो यदि वे भाजपा में शामिल होते हैं, तो इसका सीधा अर्थ होगा कि भाजपा ने पुराने मामलों के प्रेशर टेक्निक का उपयोग कर उनसे इस्तीफा दिलवाया है। क्योंकि यदि कोई व्यक्ति वास्तव में नाराजगी के कारण इस्तीफा देता है, तो वह तुरंत दूसरी पार्टी में शामिल नहीं होता। अन्यथा यदि वे कहते हैं कि मुझे कोई नाराजगी है, तो वे किसी भी पार्टी में शामिल नहीं होंगे। इसलिए जल्द ही आपको जवाब मिल जाएगा कि वास्तव में नाराजगी है या फिर भाजपा ने प्रेशर टेक्निक का उपयोग किया है। जेल के अंदर जो बातचीत हुई थी, उसके आधार पर मुझे भी ऐसे समाचार मिले थे कि भाजपा की ओर से कुछ लोग उनसे मिलने आते थे।

मैं राजकोट जेल प्रशासन और भावनगर जेल प्रशासन दोनों से अनुरोध करता हूं कि सीसीटीवी फुटेज मीडिया के सामने जारी करें, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। 31 तारीख को, जिस दिन जमानत मिली, उस दिन भी जनचर्चा में ऐसी बातें सुनने को मिलीं कि उनसे कोई भाजपा की ओर से मिलने आया था। उस रात वे बहुत लेट नाइट जेल से बाहर निकले, शाम सात बजे के बाद। सामान्यतः जमानत प्रक्रिया कितने बजे तक जमा होती है? हमारी जमानत तो साथ में मंजूर होने के बावजूद जमा नहीं हुई। तो उनकी जमानत कैसे और किस प्रकार इतनी जल्दी जमा हो गई? कौन और कितने बजे जमानत जमा कराने आया? इन सभी सवालों के जवाब के लिए हम राजकोट जेल प्रशासन से अनुरोध करते हैं कि सीसीटीवी फुटेज जारी करें ताकि सच्चाई सामने आए।

For English News: http://newz24india.in

Exit mobile version