इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा, बिजली चोरी के मामले में बना इलेक्ट्रिसिटी एक्ट एक विशेष कानून है। इसके तहत एडीजे रैंक के अधिकारी को बिजली चोरी से सम्बंधित मामलों को सुनने का अधिकार है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली चोरी के आरोप में विशेष अदालत अपर सत्र न्यायाधीश गाजियाबाद द्वारा जारी सम्मन वैध है। अतः यह क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं है। विशेष कानून सामान्य कानून पर प्रभावी होगा। याचिका में यह कहते हुए चार्जशीट और सम्मन को चुनौती दी गई थी कि बिना केस कमिट हुए बिजली चोरी मामले में सीधे सुनवाई करने का अधिकार नहीं है।

विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई और विशेष अदालत ने सम्मन जारी किया। याची का कहना था कि निष्पक्ष जांच नहीं की गई। उसने बिजली चोरी नहीं की है। अपर सत्र न्यायाधीश को धारा 193 के तहत केस सुनने का अधिकार नहीं है। विपक्षी का कहना था कि धारा 193 के साथ धारा 194 को देखने से स्पष्ट है कि विशेष अदालत ने वैध कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्यवाही की है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जमीन पर दो विद्यालयों की मान्यता देने की एसडीएम के नेतृत्व में 3 सदस्यीय टीम से जांच कराने को अवैधानिक नहीं माना। शिक्षा निदेशक को टीम की जांच रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए पक्षों को सुनकर 12 हफ्ते में आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जांच रिपोर्ट संयुक्त निदेशक को प्रेषित कर दी है। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। जिसका जवाब याची ने अभी तक नहीं दिया है।

याचिका में यह कहते हुए चार्जशीट और सम्मन को चुनौती दी गई थी कि बिना केस कमिट हुए बिजली चोरी मामले में सीधे सुनवाई करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इलेक्ट्रीसिटी एक्ट में एक जिला जज रैंक के जज की विशेष अदालत को बिजली चोरी मामले सुनने का अधिकार है। कोर्ट ने बिजली चोरी मामले में विशेष अदालत के आदेश की कार्यवाही को रद्द करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्र ने गुलफाम की याचिका पर दिया है।