राज्यदिल्ली

अरविंद केजरीवाल का सवाल- क्या अब अपने ही देश में तिरंगा फहराना अपराध है? AAP ने केंद्र को घेरा

अरविंद केजरीवाल ने सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अब देश में तिरंगा फहराना भी अपराध है?

Arvind Kejriwal on Tricolour Row: जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पूछा है कि क्या अब अपने ही देश में तिरंगा फहराना भी अपराध बन गया है?

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर उठाए सवाल

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि तिरंगा फहराने के मामले में दोनों नेताओं को गिरफ्तार करना हास्यास्पद है। केजरीवाल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि अगर पार्टी और उससे जुड़े संगठन तिरंगे को लेकर विरोध रखते हैं, तो क्या देश के युवाओं को भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोका जाएगा?

अरविंद केजरीवाल का तिरंगा विवाद पर बयान ऐसे समय आया है, जब AAP के कई वरिष्ठ नेता इस मामले को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना कर रहे हैं। पार्टी ने दोनों नेताओं की हिरासत की तुलना 1975 के आपातकाल के हालात से की है।

संजय सिंह बोले- युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश

AAP के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश में ब्रिटिश शासन जैसी स्थिति है, जहां तिरंगा फहराना और ‘भारत माता की जय’ बोलना अपराध माना जा रहा है?

संजय सिंह के मुताबिक, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्या शिंदे जंतर-मंतर पहुंचे थे, जहां उन्होंने तिरंगा फहराया और नारे लगाए। उन्होंने दावा किया कि युवाओं को राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देशभक्ति के नारे लगाने से नहीं रोका जाना चाहिए।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार गिरफ्तारियों के जरिए युवाओं की आवाज दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि देश के नौजवान बड़ी संख्या में तिरंगा फहराते रहेंगे और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं के साथ टकराव सरकार के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है।

सौरभ भारद्वाज ने 1975 की इमरजेंसी से की तुलना

AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने 1975 के आपातकाल और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच समानताएं गिनाईं। उनके अनुसार, चुनावों को लेकर विवाद, युवाओं में असंतोष, आर्थिक चुनौतियां और राजनीतिक तनाव उस समय भी चर्चा के प्रमुख विषय थे और आज भी ऐसे मुद्दे उठ रहे हैं।

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सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस तेज हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाजों को दबाने के लिए कठोर कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय से आपातकाल की आलोचना करते रहे हैं, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम को लेकर विपक्ष को फिर से आपातकाल जैसे हालात की आशंका जताने का मौका मिल रहा है। हालांकि, ये टिप्पणियां AAP नेताओं के राजनीतिक आरोप और आकलन हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद हुई कार्रवाई

इस मामले की शुरुआत 13 अक्टूबर 2026 को हुई, जब CJP के तीन सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने 11 अक्टूबर को आदेश जारी कर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया था।

आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद तीनों सदस्यों ने बैरिकेडिंग और बंद लोहे के गेटों को पार कर परिसर में प्रवेश किया और तिरंगा लेकर नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कथित आपराधिक अतिक्रमण और प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन से संबंधित मामला दर्ज किया।

इसके बाद तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि तीसरे सदस्य अजिंक्या शिंदे को शर्तों के साथ रिहा किया गया।

हिरासत के बाद बढ़ा सियासी टकराव

अरविंद केजरीवाल का तिरंगा विवाद पर बयान और AAP के अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्षी पार्टी इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रही है, जबकि मामले में पुलिस की ओर से प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन और अनधिकृत प्रवेश के आरोप लगाए गए हैं।

फिलहाल, आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत को लेकर AAP ने विरोध तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी घटनाक्रम पर सबकी नजर रहेगी।

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