ट्रेंडिंग

भारत का कृत्रिम सूरज: चीन से मुकाबला, जानें कितना होगा खर्च

भारत का कृत्रिम सूरज बनाने की दिशा में भारत की बड़ी तैयारी, SST-1, न्यूक्लियर फ्यूजन, चीन से मुकाबले और प्रोजेक्ट की लागत जानें।

भारत का कृत्रिम सूरज अब वैज्ञानिक शोध से आगे बढ़कर भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा प्रोजेक्ट बन रहा है। गुजरात के गांधीनगर स्थित इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च (IPR) में वैज्ञानिक SST-1 टोकामक के जरिए न्यूक्लियर फ्यूजन पर काम कर रहे हैं।

क्या है कृत्रिम सूरज?

सूरज के केंद्र में हाइड्रोजन के परमाणु आपस में जुड़कर ऊर्जा पैदा करते हैं। इसी प्रक्रिया को न्यूक्लियर फ्यूजन कहते हैं। वैज्ञानिक टोकामक मशीन में बेहद गर्म प्लाज्मा तैयार करके इस प्रक्रिया को धरती पर दोहराने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत ने क्या हासिल किया?

भारतीय वैज्ञानिक SST-1 में 20 करोड़ डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाला प्लाज्मा तैयार कर चुके हैं। अब 82.6 GHz फ्रीक्वेंसी और 400 किलोवाट क्षमता वाले नए गायरो ट्रॉन सिस्टम से प्लाज्मा को गर्म और नियंत्रित करने की क्षमता बढ़ाई गई है। यह भारत का कृत्रिम सूरज तैयार करने की दिशा में अहम तकनीकी कदम है।

also read:- बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सरकार सख्त, Meta ने कानून…

चीन से कितनी है टक्कर?

चीन EAST और HL-3 जैसे प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। EAST में करीब 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस प्लाज्मा को लंबे समय तक नियंत्रित करने के प्रयोग किए गए हैं। भारत भी अपनी स्वदेशी तकनीक के साथ इस वैश्विक फ्यूजन रेस में आगे बढ़ रहा है।

कितना पैसा खर्च होगा?

भारत का कृत्रिम सूरज किसी एक मशीन का छोटा प्रोजेक्ट नहीं है। इसमें कई वर्षों तक रिसर्च, मशीनरी और तकनीकी विकास पर खर्च होगा। भारत फ्रांस के ITER फ्यूजन प्रोजेक्ट में करीब 10% योगदान दे रहा है, जिसकी कुल लागत लगभग 25 अरब डॉलर बताई जाती है। साथ ही, भारत अपने SST-1 और भविष्य के SST-2 जैसे घरेलू प्रोजेक्ट पर भी निवेश कर रहा है।

अगर फ्यूजन तकनीक व्यावसायिक रूप से सफल होती है, तो भविष्य में कम कार्बन उत्सर्जन वाली बड़ी मात्रा में ऊर्जा पैदा करने की संभावना बन सकती है। हालांकि, इसे व्यावसायिक बिजली उत्पादन तक पहुंचाना अभी बड़ी वैज्ञानिक चुनौती है।

For English Newshttp://newz24india.in

Related Articles

Back to top button