नई दिल्ली: देश में बढ़ रहे ओमिक्रोन मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग ने आज बड़ा फैसला लिया है।आयोग ने चुनावी रैलियों, जुलूस और रोड शो पर पाबंदियां एक हफ्ते के लिए और बढ़ा दी हैं। इसका मतलब है अब राजनीतिक पार्टियों को चुनाव प्रचार के लिए सोशल मीडिया जैसे प्लेटफार्म पर शिफ्ट होना पड़ेगा।

सूत्रों के मुताबिक कोरोना संक्रमण और टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा के लिए शनिवार को रखी गई बैठक में इस पर सहमति बनी है।सूत्रों का कहना है कि आयोग ने प्रचार के दूसरे तरीकों में कुछ छूट दी है।बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ सभी आयुक्त और उपायुक्त शामिल हुए।

बैठक में राज्यों के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और मुख्य सचिव ने टीकाकरण और संक्रमण को लेकर अब तक की प्रगति पर जानकारी दी।सूत्रों के मुताबिक पहले चरण का चुनाव प्रचार पिछले चुनावों की तरह अगर 72 घंटे पहले ही बंद होगा तो उससे संभवत: हफ्ते भर पहले छूट मिल सकती है। बता दें कि 9 जनवरी को पांचों राज्यों के चुनानी कार्यक्रम की घोषणा के दौरान 15 जनवरी तक रैली, नुक्कड़ सभाओं, पद यात्रा, साइकिल रैली पर पूरी तरह से बैन लगा दिया था‌ 15 जनवरी को समीक्षा करने के बाद आयोग ने इस पाबंदी को लागू रखा लेकिन राजनीतिक दलों को थोड़ी राहत देते हुए बंद कमरे में अधिकतम 300 लोग या फिर कमरे की 50 प्रतिशत क्षमता के साथ सभा आयोजित करने की अनुमति दी थी।

आचार संहिता की उड़ी धज्जियां

ज्यादा जानकारी देते हुए बता दें कि चुनाव आयोग ने कोविड-19 के बढ़ रहे तेजी से देखते हुए मामलों को लेकर यह बैठक आयोजित की थी। क्योंकि पिछले कुछ दिनों में जनपदों के विधानसभा क्षेत्रों से ऐसी खबरें आ रही थी जहां चुनाव आयोग के सख्त नियमावली का पालन नहीं किया जा रहा था। जिला अमरोहा के विधानसभा क्षेत्र नौगांवा सादात से भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र नागपाल वहीं के विधानसभा क्षेत्र हसनपुर से महेंद्र सिंह खड़क वंशी और अमरोहा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी सलीम खान ने चुनाव आयोग की गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाई थी।