मुंबई: बाप-बेटे के रिश्ते को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की एक टिप्पणी सामने आई है।बॉम्बे हाई कोर्ट की बेंच ने कोल्हापुर और शिरडी के एक पुजारी की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि, सिर्फ डांटे जाने पर बेटा पिता की हत्या नहीं कर सकता। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच साल 2013 में एक बेटे द्वारा पिता की हत्या के मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान बेंच ने यह टिप्पणी की।

हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा आरोपी पर लगाए गए आजीवन कारावास की सज़ा को बरकरार रखा। बता दें कि न्यायमूर्ति विश्वास जाधव और न्यायमूर्ति संदीप कुमार मोरे की पीठ उस्मानाबाद निवासी 29 वर्षीय नेताजी टेली की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे दिसंबर 2014 में दोषी ठहराया गया था।

अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, नेताजी कोल्हापुर और शिरडी के मंदिरों में पुजारी थे। उसके पिता चाहते थे कि वह कहीं काम करे और दिसंबर 2013 में एक दिन उसके पिता ने उसे डांटा और कहा कि अगर उसने कुछ काम नहीं किया तो वह घर न आए। पिता की डांट से नाखुश नेताजी ने वृद्ध को थप्पड़ मारा और जब उसके पिता ने उसके व्यवहार पर सवाल उठाया तो उसने चाकू निकालकर पिता को चाकू मार दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। नेताजी ने न्यायमूर्ति जाधव के नेतृत्व वाली पीठ को बताया कि उन्होंने तत्काल हत्या कर दी।

उसने दावा किया कि वह अपने पिता की डांट से अचानक भड़क गया था। इस प्रकार, उन्होंने तर्क दिया कि उनके कृत्य को गैर इरादतन हत्या के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, जो कि हत्या के बराबर नहीं है। इस तर्क को ध्यान में रखते हुए, न्यायाधीशों ने कहा, “यहां तक ​​​​कि अगर हम मानते हैं कि पिता ने अपने बेटे को डांटा था, तो इस तरह के उकसावे के परिणामस्वरूप किसी भी व्यक्ति के आत्म नियंत्रण खोने की संभावना नहीं है।”