नेशनल डेस्‍क। दिल्ली ने इन-पेशेंट अस्पताल में भर्ती और सर्जरी से पहले नियमित कोविड ​​​​-19 परीक्षण को बंद करने की घोषणा की। एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डीके शर्मा ने आज एक पत्र में कहा कि वर्तमान आईसीएमटी के दिशानिर्देशों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होने (नियमित और साथ ही डेकेयर) से पहले और किसी भी छोटे या बड़े सर्जिकल इलाज के लिए कोविड टेस्टिंग की जरुरत नहीं है।

यह भी नियमों में शामिल
उनके पत्र में कहा गया है कि ओपीडी या इमरजेंसी में लाए गए रोगियों के साथ-साथ वे रोगी जो पहले कोविड -19 पॉजिटिव थे और तब से ठीक हो गए हैं और निरंतर उपचार के लिए पेरेंट विभाग के इनपेशेंट वार्ड में ट्रांसफर कर दिया गया है, उन्हें भी इन दिशानिर्देशों में शामिल किया गया है।

सभी विभागों को दी गई जानकारी
शर्मा ने कहा कि सभी केंद्रों के प्रमुखों और एम्स अस्पताल और सभी केंद्रों के सभी क्‍लीनिकल ​और नॉन क्‍लीनिकल ​​विभागों के प्रमुखों और सभी केंद्रों के एक मुख्य नर्सिंग अधिकारी या एनएस प्रभारी से अनुरोध है कि वे इसे सभी संकाय या रेजिडेंट डॉक्टरों या तकनीकी कर्मचारियों और नर्सिंग के संज्ञान में लाएं। कर्मचारियों के अनुसार यह अब किसी भी अस्पताल में भर्ती होने से पहले ऐसे किसी भी नियमित कोविड -19 टेस्टिंग के लिए आवश्यक नहीं है।

17 फरवरी से रीओपन होगी यूनिवर्सिटी
वहीं दूसरी ओर छात्रों के विरोध के बीच, डीयू प्रॉक्टर रजनी अब्बी ने बुधवार को घोषणा की कि विश्वविद्यालय 17 फरवरी को फिर से खुल जाएगा। आज शाम तक, कुलपति की ओर से एक अधिसूचना जारी की जाएगी, अब्बी ने विरोध प्रदर्शन कर रहे एबीवीपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा। एबीवीपी के 9 कार्यकर्ताओं ने कॉलेज फिर से खोलने की मांग को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में भूख हड़ताल की थी. वामपंथी कार्यकर्ता भी बुधवार को परिसर में इसका विरोध कर रहे थे।