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CPR कब देना चाहिए और कब नहीं? जानें सही तरीका, जो बचा सकता है किसी की जान

CPR कब देना चाहिए और कब नहीं? जानें सीपीआर देने का सही तरीका, जरूरी सावधानियां और कार्डियक अरेस्ट में जान बचाने के उपाय।

CPR कब देना चाहिए और कब नहीं? अचानक किसी व्यक्ति का बेहोश होकर गिर जाना और सामान्य रूप से सांस न लेना गंभीर आपातकालीन स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसे समय में सही जानकारी और तुरंत उठाया गया कदम किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एक ऐसी आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसकी मदद से हृदय गति रुकने की स्थिति में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त का प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलती है। लेकिन CPR कब देना चाहिए और किन परिस्थितियों में इसे नहीं देना चाहिए, यह जानना बेहद जरूरी है।

फोर्टिस हॉस्पिटल, बन्नेरघट्टा रोड, बेंगलुरु के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. मलरविझी संजीवी के अनुसार, आपातकालीन स्थिति में व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सांसों का आकलन करना जरूरी है। सही समय पर सीपीआर शुरू करना और मेडिकल सहायता बुलाना जीवन बचाने की संभावना बढ़ा सकता है।

CPR कब देना चाहिए?

यदि कोई व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर जाता है, आवाज देने या कंधे पर हल्के से थपथपाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो उसे तुरंत सीपीआर की जरूरत हो सकती है। कई बार व्यक्ति केवल हांफता हुआ दिखाई देता है या उसकी सांसें अनियमित होती हैं। ऐसी सांसों को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

ऐसी स्थिति में सबसे पहले आसपास की जगह को सुरक्षित देखें। इसके बाद तुरंत आपातकालीन सेवा नंबर 112 पर कॉल करें या किसी अन्य व्यक्ति को फोन करने के लिए कहें। यदि आसपास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) उपलब्ध है, तो उसे लाने के लिए भी कहें।

CPR कब देना चाहिए, इसका सबसे महत्वपूर्ण संकेत है कि व्यक्ति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा हो और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो। आम लोगों को नाड़ी जांचने में समय गंवाने के बजाय तुरंत आपातकालीन सहायता बुलाकर छाती पर दबाव देना शुरू करना चाहिए। सीपीआर शुरू करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

वयस्क को CPR देने का सही तरीका क्या है?

सीपीआर देते समय सही तकनीक का इस्तेमाल करना जरूरी है। वयस्क व्यक्ति को छाती पर दबाव देने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

व्यक्ति को सीधा लिटाएं: उसे पीठ के बल किसी सख्त और समतल सतह पर लिटाएं।

हाथों की सही स्थिति रखें: एक हाथ की हथेली का निचला हिस्सा छाती के बीचोंबीच, छाती की हड्डी पर रखें और दूसरे हाथ को उसके ऊपर रखें।

तेजी से दबाव दें: कोहनियों को सीधा रखते हुए छाती पर एक मिनट में 100 से 120 बार दबाव डालें।

दबाव की गहराई सही रखें: वयस्क की छाती को लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर तक दबाएं।

छाती को वापस सामान्य स्थिति में आने दें: हर दबाव के बाद छाती को पूरी तरह ऊपर उठने दें और दबाव के बीच अनावश्यक रुकावट न करें।

यदि आप सीपीआर में प्रशिक्षित हैं और कृत्रिम सांस देने में सहज महसूस करते हैं, तो 30 बार छाती दबाने के बाद दो रेस्क्यू ब्रीद्स दे सकते हैं। यदि आप प्रशिक्षित नहीं हैं या मुंह से सांस देने में सहज नहीं हैं, तो केवल छाती पर लगातार दबाव देकर सीपीआर जारी रखें।

CPR कब नहीं देना चाहिए?

हर बेहोश या बीमार व्यक्ति को सीपीआर की जरूरत नहीं होती। यदि व्यक्ति होश में है, प्रतिक्रिया दे रहा है और सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो उसे छाती पर दबाव नहीं देना चाहिए। ऐसी स्थिति में उसकी परेशानी का आकलन करें और जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता लें।

यदि कोई व्यक्ति बेहोश है, लेकिन सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो भी छाती पर दबाव डालकर सीपीआर शुरू नहीं करना चाहिए। तुरंत आपातकालीन सहायता बुलाएं और उसकी सांसों पर लगातार नजर रखें। यदि कोई चोट या अन्य बाधा नहीं है और ऐसा करना सुरक्षित है, तो उसे करवट के बल रिकवरी पोजिशन में लिटाया जा सकता है।

हालांकि, यदि सांस असामान्य हो जाए या बंद हो जाए, तो तुरंत स्थिति का दोबारा आकलन करें और जरूरत पड़ने पर सीपीआर शुरू करें।

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हार्ट अटैक आने पर क्या CPR देना जरूरी है?

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। हार्ट अटैक में हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ सकती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय प्रभावी ढंग से रक्त पंप करना बंद कर देता है।

यदि किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, लेकिन वह होश में है और सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो उसे सीपीआर देने की जरूरत नहीं होती। ऐसे में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाएं और व्यक्ति को खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाने से बचाएं।

लेकिन यदि व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए, प्रतिक्रिया देना बंद कर दे और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो कार्डियक अरेस्ट की आशंका में तुरंत सीपीआर शुरू करना चाहिए। यदि एईडी उपलब्ध हो, तो उसके निर्देशों का पालन करें।

इसलिए CPR कब देना चाहिए और कब नहीं, यह समझने के लिए व्यक्ति की चेतना और सामान्य सांसों पर ध्यान देना सबसे जरूरी है।

CPR देते समय किन गलतियों से बचना चाहिए?

आपातकालीन स्थिति में घबराहट के कारण लोग कई बार मदद करने में देर कर देते हैं। ऐसी गलतियों से बचना जरूरी है:

व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सांसों की जांच करने में जरूरत से ज्यादा समय न लगाएं।

केवल हांफने को सामान्य सांस न समझें।

आपातकालीन सेवा को फोन करने में देरी न करें।

छाती पर बहुत धीमे या बहुत हल्के दबाव न डालें।

दबाव देते समय बार-बार लंबे अंतराल न लें।

यदि व्यक्ति सामान्य रूप से सांस लेने लगे या प्रतिक्रिया देने लगे, तो उसकी स्थिति का दोबारा आकलन करें और आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करें।

सही समय पर CPR देना क्यों है जरूरी?

कार्डियक अरेस्ट के दौरान मस्तिष्क और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। ऐसे में तुरंत सीपीआर शुरू करना मदद पहुंचने तक रक्त प्रवाह बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही एईडी का जल्द इस्तेमाल भी जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

याद रखें, CPR कब देना चाहिए इसकी जानकारी किसी भी आपातकालीन स्थिति में उपयोगी साबित हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो तुरंत 112 पर कॉल करें और छाती पर दबाव देना शुरू करें। सीपीआर का व्यावहारिक प्रशिक्षण लेना भी बेहतर तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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