दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर की शहादत पर चर्चा के दौरान हंगामा हुआ। मंत्री प्रवेश वर्मा ने आतिशी के इस्तीफे और FIR की मांग की।
Delhi Assembly News: दिल्ली विधानसभा में बुधवार को उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत पर चल रही चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने आ गए। मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे और सदस्यता रद्द करने की मांग कर दी।
पवित्र विषय पर टिप्पणी से भड़का सदन
प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान जैसे पवित्र और ऐतिहासिक विषय पर चर्चा हो रही थी, जो पूरे देश और विशेष रूप से सिख समाज के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे सदन की भावनाएं आहत हुईं।
उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील विषय पर असंयमित टिप्पणी लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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स्पीकर को सौंपा गया औपचारिक पत्र
मंत्री प्रवेश वर्मा के साथ मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, रविंद्र इंद्रराज सिंह, कपिल मिश्रा और विधायक अभय वर्मा ने दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर औपचारिक पत्र सौंपा। पत्र में मांग की गई कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी की सदस्यता रद्द की जाए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए।
मंत्री ने कहा कि यह मामला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों की आस्था और सम्मान से जुड़ा है। ऐसे मामलों पर सख्त और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि इस तरह की भाषा का प्रयोग करने से पहले जिम्मेदारी समझे।
“महान बलिदानी का अपमान अस्वीकार्य”
प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने भावुक होते हुए कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। ऐसे महान बलिदानी के सम्मान पर किसी भी तरह की टिप्पणी देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि कथित बयान की लिखित प्रति स्पीकर को सौंप दी गई है, ताकि तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की जा सके।
सियासत हुई तेज, आगे बढ़ सकती है बहस
इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव करार दे सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले पर दिल्ली विधानसभा और राजनीतिक गलियारों में और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
गौरतलब है कि श्री गुरु तेग बहादुर सिख धर्म के नौवें गुरु थे, जिन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मुगल काल में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी शहादत को पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है।
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