गर्भावस्था के बाद यूँ तो महिलाओं में शारीरिक और मानसिक बदलाव देखने को मिलता है,!यही नहीं 40 की उम्र के बाद उनके शरीर में विटामिन डेफिशियेंसी या हड्डियों से जुड़ी समस्याएं शुरू होने लगती है।  हाल ही में हुई एक स्टडी में सामने आया है कि गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज़ होती है उनमें हार्ट संबंधित बीमारियाँ होने की ज्यादा संभावना होती है।

‘अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी’ में इस रिसर्च के बारे में प्रकाशित किया गया है। यूके बायोबैंक में मौजूद लगभग 5 लाख पार्टीसिपेंट्स के डाटा पर ये रिसर्च आधारित है। शोधकर्ताओं ने 2,19,330 महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य को देखा, जिन्होंने 2006 से 2010 तक कम से कम एक बच्चे को जन्म दिया था। परिणामों से पता चला कि लगभग 13,094 महिलाएं जेस्टेशनल डायबिटीज़ वाली थी जिन्हें हृदय संबंधी समस्याओं का अधिक खतरा था और ये जोखिम उम्र के साथ बढ़ता गया।

जेस्टेशनल डायबिटीज़ वाली महिलाओं को कोरोनरी आर्टरीज, हार्ट अटैक ,हार्ट फेल्योर, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज जैसी अन्य हार्ट से जुड़ी बीमारियां अधिक देखने को मिली। रिसर्च से पता चला कि मौजूद है जिन महिलाओं पर स्टडी की गई थी उनमें से 6% महिलाओं में हार्ट डिजीज का अधिक खतरा  देखने को मिला है। स्टडी से जुड़े एक लेखक सेउंग एमआईली जो, मैटरनल फैटल सर्विस स्पेशियलिटी एम् डी है और साथ ही  सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन में ऑबस्टेटिक्स एंड गायनेकोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं उन्होंने कहा है की हम जानते हैं जेस्टेशनल डाइबिटीज से हार्ट डिजीज हो सकती है।

इस रिसर्च में हमें पता चला है कि बच्ची को जन्म देने के बहुत समय बाद भी महिलाओं मैं हृदय संबंधित विकार हो सकते हैं। अब हमें यह पता लगाना है कि गर्भावस्था के दौरान किस तरह के उपाय किए जाएं जिससे डिलीवरी के बाद हार्ट डिसीज डेवलप होने के चांस कम हो जाए।