मूडीज का मानना है कि रूस-युक्रेन युद्ध से विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की सप्लाई चेन बाधित होगी जिससे अधिकतर देशों में महंगाई बढ़ेगी। इसका परिणाम यह होगा कि अधिकतर देशों के सेंट्रल बैंक ब्याज दर बढ़ा देंगे और विकास दर धीमी हो जाएगी। दूसरी तरफ युद्ध की वजह से स्टील, कोल, कॉपर, एल्युमीनियम जैसी धातुओं की कीमतें बढ़ने लगी हैं। इससे मैन्यूफैक्चरिंग की लागत बढ़ेगी और AC, फ्रिज व कई अन्य प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के साथ कार के दाम बढ़ सकते हैं। स्टील के दाम में पिछले एक सप्ताह में 5000 रुपए प्रति टन तो कोल के दाम में बीस फीसद तक का इजाफा हो चुका है।

कॉपर, निकेल, एल्युमीनियम जैसे धातुओं के अंतरराष्ट्रीय दाम में युद्ध के बाद से रोजाना स्तर पर बढ़ोतरी हो रही है। कच्चे तेल के दाम 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुके हैं। पेट्रोल-डीजल व गैस के दाम में भारी बढ़ोतरी दिख रही है जिससे सभी वस्तुओं की कीमतें प्रभावित होंगी। पिछले दो सप्ताह में गेहूं के दाम में भी बीस फीसद तक का इजाफा हो चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल दस डॉलर बढ़ने पर भारत की खुदरा महंगाई दर में 25 आधार अंक तक का इजाफा हो सकता हैं ।

मूडीज के अनुसार विश्व के प्रमुख देशों को भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन को दुरुस्त रखने के लिए अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा। मूडीज का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ेगा और यह इस बात पर निर्भर करता है कि युद्ध कितने दिनों तक चलता है। जिन कंपनियों का इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है, वह भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। क्योंकि वस्तुओं की कीमतें ब्याज दरें दोनों में बढ़ोतरी हो सकती हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद स्टील निर्माताओं ने हॉट रोल्ड कॉयल (HRC) और टीएमटी बार के दाम में 5000 रुपए प्रति टन का इजाफा कर दिया है। युद्ध के जारी रहने पर इनमें और इजाफा हो सकता है। वैसे ही, कोल की कीमत 500 डॉलर प्रति टन हो चुकी है जो पिछले कुछ सप्ताह के मुकाबले बीस फीसद अधिक है। कॉपर की कीमत बढ़ोतरी के साथ 10,545 डॉलर प्रति टन, एल्युमीनियम 3,710 डॉलर प्रति टन तो निकेल की कीमत भी बढ़ोतरी के साथ 27,815 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई है।