जयपुर में आयोजित होने वाले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के एक ऑनलाइन सेशन में अपने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की भांजी नयनतारा सहगल ने मौजूदा मोदी सरकार पर कुछ सवाल उठाए हैं। नयनतारा ने इनटोलरेंस के बढ़ने और गांधी-नेहरू युग के सर्वहितकारी मूल्यों को खत्म करने की बात कही है ।

गीता सहगल से चर्चा के दौरान नयनतारा सहगल ने तमाम लेखकों के अवॉर्ड वापसी आंदोलन के बाद गांधी-नेहरू दौर के मूल्यों को खत्म कर सेंसरशिप को कारण बताया है। गीता सहगल ने बोला – बीफ ले जाने के एक झूठे आरोप में एक निर्दोष और गरीब व्यक्ति को मार दिया जाता है । वही दूसरी ओर ईद मनाने जा रहे सिर्फ़ 15 साल के बच्चे को हिंदुत्ववादियों की भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया गया , तीन लेखकों की भी हत्या हुई, मगर इन सब को इग्नोर किया गया।

नयनतारा सहगल ने बताया कि इन घटनाओं ने उन्हें पूरी तरह से हिलाकर रख दिया था। इसके तुरंत बाद हाई उन्होंने अपना साहित्य अकादमी अवॉर्ड भी लौटा दिया था ।जिन लेखकों ने अवॉर्ड वापसी आंदोलन किया उसका उद्देश सिर्फ़ इतना था की जिस भारत को हम जानते हैं, उसे खत्म करने के खिलाफ काफ़ी साज़िशें हो रही है । और 2014 के बाद उन्होंने कई मौकों पर ऐसा महसूस किया है ।

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नयनतारा सहगल ने बोला कि “देश के व्याप्त सर्व्जंहित्करी मूल्यों और सहनशीलता को खत्म करने के खिलाफ ही , इस अवॉर्ड लौटाने का मूवमेंट शुरू किया गया था। नेहरू-गांधी दौर में जिन सार्वजनिक मापदंडों और देश में प्रतिपादित मूल्य थे उन्हें खत्म करने का प्रयास किया जा रहा हैं। इस मोदी सरकार का बस इसी पर फोकस है। और इसी कड़ी में अब अनमैकिंग ऑफ इंडिया पर फोकस किया जा रहा है। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में पूरे देश के लोगों का योगदान रहा है। देश की आजादी के लिए लड़ने वालों ने अपने कुछ मापदंड और वैल्यूज तय किए थे। आज कल मोदी सरकार जो कर रही है, उस पर ज्यादातर देश में सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा जाहिर किया।