इसुदान गढ़वी ने गुजरात के प्रभावित क्षेत्रों में सूखा घोषित करने, किसानों को राहत और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था की मांग की।
आम आदमी पार्टी (AAP) गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने राज्य के बारिश की कमी से प्रभावित इलाकों में गुजरात में सूखा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से हाथ जोड़कर अपील करते हुए प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता और पर्याप्त चारे की व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की।
गढ़वी के मुताबिक जामनगर, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, उत्तर गुजरात और कच्छ के कई तालुकों में बारिश की कमी के कारण खेती प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि कई गांवों में किसानों की फसलें सूख रही हैं और उन्हें सरकारी सहायता की आवश्यकता है।
मूंगफली की फसल को लेकर AAP का दावा
इसुदान गढ़वी ने कहा कि कुछ इलाकों में मूंगफली समेत अन्य फसलों पर बारिश की कमी का असर पड़ा है। उनके अनुसार, कई खेतों में मूंगफली के पौधे सूख चुके हैं और अब बारिश होने के बावजूद कुछ फसलों को बचाना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने सरकार से गुजरात में सूखा घोषित करने के साथ किसानों के लिए राहत पैकेज और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने की मांग की। गढ़वी ने कहा कि बटाईदारों, खेत मजदूरों और कृषि श्रमिकों के लिए भी तत्काल राहत कार्य शुरू किए जाने चाहिए।
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महाराष्ट्र का उदाहरण देकर सरकार पर सवाल
AAP नेता ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए गुजरात सरकार से सवाल किया कि अगर वहां बारिश की कमी से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत संबंधी कदम उठाए जा सकते हैं, तो गुजरात के किसानों के लिए समान स्तर पर सहायता क्यों नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी प्रभावित गांवों में जाकर किसानों से संपर्क कर रही है और सहायता से संबंधित फॉर्म भरवा रही है। गढ़वी ने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सरकार से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
सरकार से तत्काल राहत की मांग
इसुदान गढ़वी ने कहा कि गुजरात में सूखा घोषित किए जाने के साथ किसानों को आर्थिक सहायता, सिंचाई के लिए पानी और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा या अन्य माध्यमों से राहत कार्य शुरू किए जाएं, ताकि किसानों के साथ-साथ बटाईदारों और मजदूरों को भी रोजगार मिल सके।
गढ़वी ने राज्य के बीजेपी विधायकों और सांसदों से भी अपने-अपने क्षेत्रों के किसानों की समस्याओं को सरकार के सामने उठाने की अपील की।
गुजरात सरकार का क्या कहना है?
सूखे की घोषणा को लेकर गुजरात सरकार का रुख AAP की मांग से अलग है। राज्य सरकार ने विधानसभा में कहा है कि केवल बारिश की कमी के आधार पर किसी क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए केंद्र के Drought Management Manual के तहत कई संकेतकों का वैज्ञानिक आकलन किया जाता है। इनमें बारिश, बुवाई, फसल की स्थिति, NDVI, मिट्टी की नमी और भूजल स्तर जैसे मानक शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, सितंबर की शुरुआत तक गुजरात में औसत मौसमी बारिश 75.43 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जबकि देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ जैसे क्षेत्रों में बारिश काफी कम रही। सरकार ने प्रभावित इलाकों में चारे, पानी और कृषि बिजली की व्यवस्था को लेकर भी कदम उठाने की जानकारी दी है।
प्रभावित इलाकों में राहत को लेकर राजनीतिक दबाव
बारिश की कमी को लेकर गुजरात में किसानों की स्थिति राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई है। इससे पहले भी विपक्षी नेताओं ने फसल नुकसान और राहत को लेकर सरकार से कदम उठाने की मांग की है। हालिया रिपोर्टों में कच्छ, सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के कुछ हिस्सों में बारिश की कमी और फसलों पर असर का उल्लेख किया गया है।
इसुदान गढ़वी ने कहा कि यदि सरकार जल्द फैसला नहीं लेती है तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर आंदोलन का अगला चरण शुरू करेगी। उन्होंने किसानों, बटाईदारों और कृषि मजदूरों के लिए तत्काल सहायता की मांग दोहराई।
फिलहाल गुजरात में सूखा घोषित करने का अंतिम फैसला सरकार द्वारा वैज्ञानिक आकलन और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाना है। सरकार ने कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर निगरानी जारी है और मूल्यांकन के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।
किसानों की फसल, पानी और चारे से जुड़ी स्थिति के बीच गुजरात में सूखा घोषित करने की मांग आने वाले दिनों में राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है।
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