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जयपुर की 63 फैक्ट्रियों पर बंद होने का खतरा, NGT के आदेश से बढ़ी उद्यमियों की चिंता

जयपुर के विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया की 63 फैक्ट्रियों पर NGT के आदेश के बाद बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। जानें पूरा जमीन विवाद।

जयपुर के विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया (VKI) में जयपुर की 63 फैक्ट्रियां इन दिनों संकट में हैं। करीब सात दशक पुराने जमीन विवाद और सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े मामले के चलते इन औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बीड़ पापड़ क्षेत्र की जमीन को वन भूमि मानते हुए वहां मौजूद निर्माण हटाने और जमीन खाली कराने का निर्देश दिया है।

NGT के आदेश के बाद जयपुर की 63 फैक्ट्रियां और उनमें काम करने वाले कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। इन इकाइयों में लंबे समय से कारोबार चल रहा है और इनमें बड़ी मात्रा में निजी निवेश भी किया गया है। उद्यमियों का कहना है कि उन्होंने सरकारी एजेंसी द्वारा किए गए आवंटन और उपलब्ध रिकॉर्ड पर भरोसा करके यहां उद्योग स्थापित किए थे।

करीब 550 बीघा जमीन पर क्या है विवाद?

विवाद बीड़ पापड़ क्षेत्र के खसरा नंबर 7/2 से जुड़ा है। करीब 550 बीघा जमीन को NGT ने वन भूमि के रूप में माना है। ट्रिब्यूनल के निर्देश के मुताबिक संबंधित जमीन को 30 दिनों के भीतर खाली कराने और वहां किए गए निर्माण हटाने की कार्रवाई की जानी है।

इस आदेश का सीधा असर उन औद्योगिक इकाइयों पर पड़ सकता है, जो इस क्षेत्र में वर्षों से संचालित हो रही हैं। यही वजह है कि जयपुर की 63 फैक्ट्रियां चलाने वाले उद्यमी अब प्रशासन और सरकार से समाधान की मांग कर रहे हैं।

करोड़ों के निवेश के साथ हजारों नौकरियों पर असर

इन औद्योगिक इकाइयों में करोड़ों रुपये का निवेश लगा हुआ है। कई कारोबारियों ने बैंक से लोन लेकर अपनी फैक्ट्रियां स्थापित की हैं। अगर कार्रवाई होती है तो सिर्फ उद्योगों के मालिक ही प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि इन इकाइयों में काम करने वाले बड़ी संख्या में मजदूरों और कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट भी पैदा हो सकता है।

उद्यमियों का कहना है कि उद्योग स्थापित करते समय उन्होंने सरकारी विभागों और राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (RIICO) की प्रक्रिया पर भरोसा किया था। उनका दावा है कि कई वर्षों से वे टैक्स और अन्य सरकारी शुल्क भी नियमित रूप से जमा करते आ रहे हैं।

उद्यमियों ने उठाया जिम्मेदारी का सवाल

कारोबारियों का मुख्य सवाल यह है कि अगर जमीन के रिकॉर्ड या आवंटन प्रक्रिया में कोई खामी थी तो उसकी जिम्मेदारी उन लोगों पर क्यों डाली जा रही है, जिन्होंने सरकारी प्रक्रिया के तहत जमीन लेकर अपना व्यवसाय खड़ा किया?

उद्यमियों के मुताबिक जमीन आवंटन सरकारी एजेंसी के माध्यम से हुआ था। इसके बाद नक्शे और अन्य प्रक्रियाएं भी संबंधित विभागों की निगरानी में पूरी हुईं। ऐसे में उनका कहना है कि मौजूदा विवाद का समाधान सरकार और संबंधित विभागों के स्तर पर निकाला जाना चाहिए।

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फैक्ट्रियां न तोड़ने की मांग

विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने मांग की है कि जब तक मामले का कानूनी समाधान नहीं निकलता, तब तक किसी भी औद्योगिक इकाई को सील करने, खाली कराने या निर्माण हटाने की कार्रवाई नहीं की जाए।

एसोसिएशन की ओर से वन विभाग के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया है। उद्यमियों का कहना है कि इससे वन विभाग से जुड़े मुद्दे का समाधान भी तलाशा जा सकता है और वर्षों से चल रहे उद्योगों को अचानक बंद होने से बचाया जा सकता है।

RIICO कर रहा समाधान की कोशिश

RIICO के प्रबंध निदेशक सुरेश कुमार ओला के मुताबिक मामले को सुलझाने के लिए जयपुर कलेक्टर और वन विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है। RIICO इस मामले में कानूनी राय भी ले रहा है।

बताया गया है कि NGT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के साथ ही NGT में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में कैमरे के सामने कोई विस्तृत बयान नहीं दिया गया है।

आंदोलन की चेतावनी

मामले में जयपुर की 63 फैक्ट्रियां अब कानूनी और प्रशासनिक समाधान का इंतजार कर रही हैं। उद्यमियों की चिंता सिर्फ उनके कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों की आय भी इससे जुड़ी हुई है।

एसोसिएशन ने संकेत दिया है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। ऐसे में जयपुर की 63 फैक्ट्रियां वाला यह विवाद अब जमीन के पुराने रिकॉर्ड से आगे बढ़कर उद्योग, रोजगार और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गया है।

फिलहाल निगाहें RIICO, राज्य सरकार, वन विभाग और अदालतों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते कोई कानूनी रास्ता नहीं निकलता है, तो जयपुर की 63 फैक्ट्रियां और उनसे जुड़े हजारों लोगों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।

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