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Kalash Sthapana Muhurat 2026: शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त, जानें घटस्थापना की विधि

शारदीय नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना के दो शुभ मुहूर्त, घटस्थापना की विधि और पूजा सामग्री की पूरी जानकारी जानें। सही मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

Kalash Sthapana Muhurat 2026: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होने जा रहा है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के साथ घटस्थापना की जाती है। हिंदू मान्यताओं में कलश स्थापना को नवरात्रि पूजा की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में भक्तों के लिए सही मुहूर्त जानना जरूरी है, ताकि वे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कर सकें।

अगर आप भी इस साल घर में मां दुर्गा का स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं, तो Kalash Sthapana Muhurat 2026 से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां जान सकते हैं। कलश स्थापना के लिए सुबह का समय और दोपहर का अभिजित मुहूर्त शुभ माने जाते हैं। हालांकि, पूजा का समय तय करने से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त की पुष्टि जरूर कर लें।

कलश स्थापना के लिए कौन-से हैं दो शुभ मुहूर्त?

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के लिए प्रातःकाल का समय विशेष महत्व रखता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है।

1. प्रातःकाल का मुहूर्त

सुबह का समय कलश स्थापना के लिए शुभ माना जाता है। दिए गए मुहूर्त विवरण के अनुसार, सुबह 6 बजे से 10 बजे के बीच घटस्थापना की जा सकती है। हालांकि, यह समय सामान्य जानकारी पर आधारित है। 11 अक्टूबर 2026 के लिए अपने शहर के पंचांग में निर्धारित सटीक समय जरूर जांचें।

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2. अभिजित मुहूर्त

यदि सुबह कलश स्थापना करना संभव न हो, तो अभिजित मुहूर्त का विकल्प देखा जा सकता है। दिए गए विवरण के अनुसार, यह समय दोपहर 11:45 बजे से 12:30 बजे तक बताया गया है। अभिजित मुहूर्त का सटीक समय स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए पूजा से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है।

ध्यान रखें कि Kalash Sthapana Muhurat 2026 चुनते समय केवल सामान्य समय पर निर्भर न रहें। स्थानीय सूर्योदय, पंचांग और उस दिन के शुभ-अशुभ समय को ध्यान में रखकर घटस्थापना करें।

कलश स्थापना से पहले इन बातों का रखें ध्यान

पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करके पवित्र करें।

घटस्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, कलश, जल, अक्षत, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते तैयार रखें।

कलश पर स्वास्तिक बनाएं और उसके गले में कलावा बांधें।

नारियल को लाल कपड़े या चुनरी से सजाकर कलश के ऊपर स्थापित करें।

पूजा के दौरान मां दुर्गा का ध्यान करें और अपनी परंपरा के अनुसार मंत्रों का जाप करें।

राहुकाल और अन्य अशुभ समय से संबंधित जानकारी स्थानीय पंचांग से जांच लें।

नवरात्रि में कलश स्थापना की संपूर्ण विधि

पहला चरण: पूजा स्थल की सफाई

सबसे पहले घर के पूजा स्थान या ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को साफ करें। इसके बाद गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें। पूजा की सामग्री को व्यवस्थित तरीके से रख लें।

दूसरा चरण: मिट्टी और जौ की तैयारी

पूजा स्थल पर मिट्टी से वेदी तैयार करें। इसमें जौ बोए जा सकते हैं, जिन्हें नवरात्रि के दौरान श्रद्धा के साथ सींचा जाता है। जौ बोने की परंपरा को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

तीसरा चरण: कलश तैयार करना

तांबे, पीतल या मिट्टी के साफ कलश पर स्वास्तिक बनाएं और उसके गले में कलावा बांधें। इसके बाद कलश में स्वच्छ जल भरें। अपनी पूजा परंपरा के अनुसार उसमें गंगाजल, अक्षत, सुपारी, दूर्वा और सिक्का डाल सकते हैं।

चौथा चरण: आम के पत्ते लगाना

कलश के मुख पर पांच या सात आम के पत्ते रखें। कुछ परंपराओं में आम के स्थान पर अशोक के पत्तों का इस्तेमाल भी किया जाता है। पूजा सामग्री और विधि क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।

पांचवां चरण: नारियल स्थापित करना

नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें। इसके बाद उसे कलश के ऊपर सावधानी से स्थापित करें। नारियल रखने की दिशा और अन्य रीति-रिवाजों के लिए अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।

छठा चरण: मां दुर्गा का आह्वान

तैयार कलश को पूजा स्थल पर स्थापित करें। इसके बाद हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें और उनका आह्वान करें। अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें। अखंड ज्योति जलाने की परंपरा हो, तो सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

नवरात्रि में कलश स्थापना का क्या है महत्व?

हिंदू धर्म में कलश को शुभता, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन इसकी स्थापना करके भक्त मां दुर्गा से सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। इसके साथ ही नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।

इस प्रकार, Kalash Sthapana Muhurat 2026 की जानकारी लेकर भक्त नवरात्रि की पूजा की तैयारी कर सकते हैं। ध्यान रहे कि यहां दिए गए समय सामान्य विवरण पर आधारित हैं। घटस्थापना से पहले 11 अक्टूबर 2026 का स्थानीय पंचांग देखकर सटीक मुहूर्त की पुष्टि जरूर करें।

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