Makar Sankranti 2026 पर दुर्लभ संयोग, जानें स्नान-दान मुहूर्त और पुण्य लाभ
“Makar Sankranti 2026: जानें इस दुर्लभ संयोग वाले दिन स्नान-दान मुहूर्त, सूर्य और विष्णु पूजा के फायदे। गंगा स्नान और तिल-गुड़ दान से प्राप्त करें पुण्य और समृद्धि।”
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्व रखता है। हर साल यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को पड़ रही है और इस दिन दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन स्नान-दान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
Makar Sankranti 2026 का स्नान-दान मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष मकर संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 9:03 बजे से शाम 5:46 बजे तक रहेगा। वहीं महा पुण्यकाल सुबह 9:03 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा। इस समय स्नान-दान करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति के जीवन में धन-धान्य और खुशहाली बढ़ती है।
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दुर्लभ योग: मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी
इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही, इस दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। इस शुभ संयोग में गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने तथा दान करने से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। साथ ही, पितरों को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।
मकर संक्रांति पर कौन-कौन से दान करें? Makar Sankranti 2026 Daan
तिल और गुड़ का दान: सूर्य से जुड़े दोषों से मुक्ति मिलती है।
खिचड़ी और कंबल का दान: गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न और कंबल देने से धन-धान्य में वृद्धि होती है।
गंगा स्नान और सूर्य पूजा: दिन की शुरुआत गंगा स्नान और सूर्य देव की उपासना से करें।
भगवान विष्णु को तिल के लड्डू का भोग: इससे जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है।
मकर संक्रांति पर किए गए ये धार्मिक क्रियाकलाप न सिर्फ पापों का नाश करते हैं बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लाते हैं। यह पर्व परिवार और समाज में भाईचारे, सहयोग और संतुलन की भावना भी बढ़ाता है।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति को सूर्य देव की उपासना और तिल-गुड़ के दान का पर्व माना जाता है। इसे पर्व का महत्व आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से है। स्नान, दान और पूजा करने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ और आर्थिक स्थिरता मिलती है। इस दिन किए गए कर्मों के पुण्य से जीवन खुशहाल बनता है।
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