एएनआई: शुक्रवार को विदेश मंत्रालय की ओर से एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इसमें मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने विभिन्न मुद्दों पर जानकारी दी।

रूस के साथ भारत के एस-400 (मिसाइल) सौदे पर अमेरिका की नाराजगी पर विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत और अमेरिका के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। भारत और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी है। हम एक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाते हैं, यह हमारे रक्षा अधिग्रहण पर भी लागू होती है।

अमेरिका और मिलान में खालिस्तानी विरोध पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, हाल ही में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां कट्टरपंथी तत्वों ने विदेशों में राजनयिक परिसरों में तोड़फोड़ करने की कोशिश की। वाशिंगटन डीसी में गांधी प्रतिमा को तोड़ने करने का प्रयास किया गया था। हमने संबंधित मेजबान सरकारों के साथ इस मुद्दे को उठाया है और कार्रवाई का आह्वान किया है।

अफगानिस्तान मुद्दे पर मंत्रालय ने कहा,भारत सरकार अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। गेहूं की खरीद और उसके परिवहन की व्यवस्था करने की प्रक्रिया चल रही है।

वहीं एलएसी के साथ शांति वार्ता पर अरिंदम बागची ने कहा,भारत-चीन कमांडर-स्तरीय बैठक का 14वां दौर इसी साल 12 जनवरी को हुआ था, अगले दौर की वार्ता जल्द से जल्द होनी चाहिए।आखिरी बातचीत में दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि शेष मुद्दों के समाधान से बहाली में मदद मिलेगी।

अरिंदम बागची ने भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (आईएएमसी) के कार्यक्रम पर भी बातचीत की, जिसमें पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी शामिल हुए थे और जिससे देश में विवाद छिड़ गया है। मंत्रालय ने कहा कि, यह दावा बिल्कुल गलत और ढोंग करने वाला है कि अन्य लोगों को हमारे देश के संविधान की सुरक्षा करने की आवश्यकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजकों का ट्रैक रिकॉर्ड पूरी तरह से पक्षपाती और प्रतिभागियों के राजनीतिक हितों के समर्थन करने वाला रहा है।