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जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल दिलाने की मांग, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल से की मुलाकात

भगवंत मान ने जगतार सिंह हवारा के लिए 10 दिन की पैरोल मांगी। बीमार मां से मुलाकात के लिए मान ने राज्यपाल से मानवीय आधार पर अपील की।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की मांग की। मुख्यमंत्री ने यह मांग मानवीय आधार पर रखी है। हवारा की मां लंबे समय से बीमार हैं और वह अपने बेटे से मिलना चाहती हैं।

मां की बीमारी का दिया हवाला

भगवंत मान ने कहा कि पैरोल की मांग के पीछे मुख्य वजह हवारा की मां की खराब सेहत है। वह काफी समय से बीमार चल रही हैं और अपने बेटे से मुलाकात करना चाहती हैं। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि मानवीय पहलू को देखते हुए हवारा को कुछ समय के लिए अपनी मां से मिलने की अनुमति मिल सकती है।

जगतार सिंह हवारा पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं और फिलहाल दिल्ली में बंद हैं।

पैरोल मिलने पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा

राज्यपाल से मुलाकात के बाद भगवंत मान ने कहा कि अगर हवारा को पैरोल मिलती है तो पंजाब सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस दौरान किसी तरह की नारेबाजी, विरोध-प्रदर्शन या ऐसी गतिविधि नहीं होने दी जाएगी, जिससे माहौल खराब हो।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, हवारा की रिहाई की मांग से जुड़े सिख संगठनों ने भी सरकार को सहयोग का भरोसा दिया है। उन्होंने शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने पर सहमति जताई है।

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चंडीगढ़ प्रशासन के जरिए आगे बढ़ेगा मामला

भगवंत मान ने बताया कि इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन की भी भूमिका है। इसलिए पैरोल से जुड़ी सिफारिश चंडीगढ़ प्रशासन के माध्यम से आगे बढ़ाई जानी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतिम फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से लिया जाएगा। पंजाब सरकार ने 10 दिन की पैरोल के लिए औपचारिक अनुरोध किया है और संबंधित प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है।

मान के अनुसार, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उन्हें भरोसा दिया है कि इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा और जरूरी औपचारिकताएं शुरू की जाएंगी।

तीन दशक से ज्यादा पुराना है मामला

मुख्यमंत्री ने इस मामले के लंबे समय से चले आने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटना को तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है। ऐसे में हवारा की मां की बीमारी और अपने बेटे से मिलने की इच्छा को मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

अगर पैरोल मंजूर होती है तो हवारा को अपनी बीमार मां के साथ कुछ समय बिताने का अवसर मिल सकता है।

पंजाब की राजनीति पर भी पड़ सकता है असर

जगतार सिंह हवारा की पैरोल की मांग पंजाब में राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार के इस कदम को कुछ राजनीतिक विश्लेषक पंथिक वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर देख सकते हैं।

हालांकि, भगवंत मान सरकार के सामने मानवीय आधार पर पैरोल की मांग के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को संतुलित रखने की चुनौती भी है। अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस पैरोल अनुरोध पर क्या फैसला लेती है।

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