उत्तराखंड में ‘सेवा, सुशासन और समर्पण’ अभियान तेज, CM पुष्कर सिंह धामी बोले- राजनीति को सेवा और संकल्प का माध्यम बनाया
'सरकार हर द्वार' जनसंपर्क कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, हरेला पर्व पर किया पौधारोपण और प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश
उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राजनीति को सेवा और संकल्प का माध्यम बनाया है। हरेला पर्व पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को राज्यव्यापी ‘सेवा, सुशासन और समर्पण’ अभियान के तहत आयोजित ‘सरकार हर द्वार’ जनसंपर्क कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने लोगों से सीधा संवाद किया और सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व के अवसर पर आयोजित वृक्षारोपण अभियान में भी हिस्सा लिया। उन्होंने गरुड़बाज ग्राउंड परिसर में एक पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड का संदेश दिया।
‘सत्ता नहीं, जिम्मेदारी है’
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता को कभी विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जनता की सेवा की जिम्मेदारी माना है। उन्होंने कहा कि राजनीति को सेवा और संकल्प का माध्यम बनाकर राज्य सरकार जनहित में लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ पूरे उत्तराखंड में ‘सेवा पखवाड़ा’ मनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इसी कारण प्रशासन लोगों के घर-घर तक पहुंचकर सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार “सरलीकरण, समाधान, संकल्प और संतुष्टि” के मंत्र पर काम कर रही है, ताकि आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं आसानी से और पारदर्शी तरीके से मिल सकें।
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हरेला पर्व पर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड में यह पर्व सदियों से प्रकृति के सम्मान और संरक्षण का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की परंपरा विकसित की थी, जिसे आगे बढ़ाना आज की आवश्यकता है।
उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण और जल बचाने की अपील करते हुए कहा कि बढ़ते जलवायु परिवर्तन के दौर में प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जल और जंगल बचाने पर दिया जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा, नदियों और जंगलों से है। यदि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना है, तो जल, जंगल और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाना होगा।
उन्होंने नागरिकों से हरेला जैसे पारंपरिक पर्वों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश घर-घर तक पहुंचाने की अपील की और कहा कि प्रकृति की रक्षा ही मानव जीवन की सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार है।
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