राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में आज 273 नगर निकायों के प्रमुख पदों पर चुनाव होगा। 5 नगर निगमों के मेयर और 268 निकायों के अध्यक्ष चुने जाएंगे।
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के तहत सोमवार, 21 सितंबर को राज्य के 273 शहरी स्थानीय निकायों में प्रमुख पदों के लिए चुनाव हो रहा है। इनमें पांच नगर निगम भी शामिल हैं। मतदान सुबह 10 बजे शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चलेगा। इसके बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
इस चुनाव के जरिए पांच नगर निगमों में महापौर और अन्य शहरी निकायों में अध्यक्ष पद के लिए फैसला होगा। हालांकि जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के मेयर चुनाव को पहले हुए पुनर्मतदान और लंबित वार्ड परिणामों के कारण 25 सितंबर तक टाल दिया गया है।
10 से 2 बजे तक होगा मतदान
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के इस चरण में मतदान के लिए चार घंटे का समय निर्धारित किया गया है। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाली वोटिंग दोपहर 2 बजे समाप्त होगी। इसके बाद संबंधित निकायों में मतगणना कर प्रमुख पदों के नतीजे घोषित किए जाएंगे।
राज्य में कई निकायों में बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। चुनाव से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति अपनाई है।
जयपुर, जोधपुर और कोटा में 25 सितंबर को मेयर चुनाव
जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के महापौर चुनाव आज नहीं होंगे। इन तीनों नगर निगमों के कुछ वार्डों में ईवीएम से जुड़े तकनीकी कारणों के चलते पुनर्मतदान कराया गया था। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने इन निकायों में महापौर चुनाव के लिए 25 सितंबर की तारीख निर्धारित की।
इन तीन शहरों के साथ सुकेत नगर पालिका के अध्यक्ष पद का चुनाव भी 25 सितंबर को होगा। उपाध्यक्ष और उपमहापौर पदों के लिए अगले दिन यानी 26 सितंबर को चुनाव कराया जाना है।
अशोक गहलोत ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल
चुनाव से पहले राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ कांग्रेस पार्षदों को पुलिस और एसीबी के नोटिस दिए जा रहे हैं तथा तिजारा के कांग्रेस पार्षदों को हरियाणा के पंचकुला में रोके जाने और पूर्व विधायक संदीप यादव को गुड़गांव में हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि यह सामान्य जांच नहीं बल्कि लक्षित कार्रवाई है। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा पुलिस के पास कुछ पार्षदों की तस्वीरें पहले से मौजूद थीं और चेहरा देखकर उन्हें अन्य लोगों से अलग किया जा रहा था।
ये आरोप अशोक गहलोत द्वारा लगाए गए हैं। इनके संबंध में संबंधित प्रशासन या हरियाणा सरकार का पक्ष इस रिपोर्ट में स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं किया गया है।
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राजस्थान सरकार से की हस्तक्षेप की मांग
अशोक गहलोत ने अपने बयान में राजस्थान के मुख्यमंत्री और राज्य निर्वाचन आयोग से भी मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उनका कहना था कि चुनाव में मतदान करने के लिए आने वाले निर्वाचित पार्षदों को अपनी इच्छा के अनुसार आने-जाने की अनुमति सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राज्य की पुलिस द्वारा राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़े पार्षदों को रोकना चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसा है। गहलोत ने राज्य निर्वाचन आयोग से आवश्यक कदम उठाने की अपील भी की।
निर्दलीय पार्षदों पर कई जगह नजर
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका कई निकायों में महत्वपूर्ण बनी हुई है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार कई नगर निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, जिससे निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बोर्ड गठन और प्रमुख पदों के चुनाव में अहम हो सकता है।
सोमवार के चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की नजर उन पार्षदों पर भी रहेगी जिनका समर्थन प्रमुख पदों के लिए बहुमत के आंकड़े को प्रभावित कर सकता है।
आज के चुनाव के बाद 25 सितंबर पर नजर
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 का मौजूदा चरण सोमवार को कई नगर निकायों के प्रमुखों के चुनाव के साथ आगे बढ़ेगा, जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े नगर निगमों में मेयर पद का फैसला 25 सितंबर को होगा। ऐसे में राज्य के शहरी निकायों की राजनीति में अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण रहेंगे।
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