राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने स्कूली शिक्षा में सुधार, नैतिक मूल्यों, तार्किक सोच और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं होना चाहिए। इसके माध्यम से बच्चों में बौद्धिक क्षमता, नैतिक मूल्यों, विवेक और तार्किक सोच का भी विकास होना जरूरी है। शुक्रवार को सीकर में आयोजित शेखावाटी साहित्य संगम को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखने की बात कही।
शिक्षा में बौद्धिक विकास के साथ नैतिक मूल्यों पर भी ध्यान जरूरी
शेखावाटी साहित्य संगम में अपने संबोधन के दौरान राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि शिक्षा विद्यार्थियों की सोच को व्यापक बनाने और उनके व्यक्तित्व को निखारने का माध्यम है। बच्चों को पढ़ाई के साथ नैतिकता, समझदारी और सांस्कृतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों को सवाल पूछने, विभिन्न विषयों पर विचार करने और सही-गलत के बीच अंतर समझने के लिए प्रेरित करे। इससे बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा और वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभा सकेंगे।
शेखावाटी की वीरता और बलिदान की परंपरा का किया उल्लेख
राज्यपाल ने शेखावाटी क्षेत्र की विशेषताओं का जिक्र करते हुए इसे वीरता, बलिदान और उद्यमशीलता की भूमि बताया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र ने देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
हरिभाऊ बागड़े के अनुसार, शेखावाटी में ऐसे कई परिवार हैं, जिनकी तीसरी और चौथी पीढ़ी भी देश की रक्षा के लिए सेना में सेवाएं दे रही है। यह परंपरा क्षेत्र के लोगों के साहस, समर्पण और देशभक्ति को दर्शाती है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बच्चों को अपनी क्षेत्रीय विरासत और देश के प्रति जिम्मेदारियों से परिचित कराना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन मूल्यों को आगे बढ़ा सकें।
also read:- राजस्थान जिला वार बजट आवंटन: जयपुर को सबसे ज्यादा, सलूंबर…
साहित्य से बढ़ता है ज्ञान और विचारों का दायरा
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने साहित्यिक आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम लोगों को अपने विचार साझा करने और दूसरों के दृष्टिकोण को समझने का अवसर देते हैं।
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने बताया कि साहित्य के माध्यम से ज्ञान का विस्तार होता है और सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है। साहित्यिक चर्चाएं व्यक्ति की समझ को विकसित करने के साथ समाज में बौद्धिक संवाद को भी प्रोत्साहित करती हैं।
राज्यपाल के मुताबिक, बच्चों और युवाओं को साहित्य से जोड़ना उनके मानसिक विकास और व्यक्तित्व निर्माण के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
रामायण, महाभारत और उपनिषदों की प्रासंगिकता पर चर्चा
भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए हरिभाऊ बागड़े ने रामायण, महाभारत और उपनिषदों की महत्ता पर बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय ग्रंथों का अध्ययन विदेशों में भी किया जाता है और उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं।
उन्होंने विज्ञान और गणित के क्षेत्र में भारत के योगदान का भी जिक्र किया, विशेष रूप से शून्य की अवधारणा को भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों और परंपराओं की जानकारी भी विद्यार्थियों को मिलनी चाहिए।
लोक साहित्य और संस्कृति से बच्चों में विकसित होते हैं देशभक्ति के भाव
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने राजस्थान के लोक साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं को बच्चों में देशभक्ति, साहस और बलिदान की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय इतिहास और लोक परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करती हैं।
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को राष्ट्र निर्माण का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने नागरिकों से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में अपना योगदान देने का आह्वान भी किया।
उनका संदेश था कि देश के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए विद्यार्थियों में ज्ञान, विवेक, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना जरूरी है।
For English News: http://newz24india.in
Visit WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb4ZuKSLSmbVWNb1sx1x



