ऑस्‍ट्रेलिया की नैशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जियी झू और उनके साथियों ने धरती के supermountains के निर्माण की जांच की है।  जिसके आधार पर वैज्ञानिकों ने धरती में हिमालय से भी 3 गुना बड़े पहाड़ों की खोज की है।शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि सबसे पहले सुपरमाउंटेन 2 से 1.8 अरब साल पहले बने थे जब नूना महाद्वीप का जमाव हो रहा था। वहीं दूसरी बार 65 करोड़ से 50 करोड़ साल पहले गोंडवाना महाद्वीप के निर्माण के समय सुपरमाउंटेन बना था।

जियी झू ने बताया कि ‘हम नूना सुपरमाउंटेन को पहला उदाहरण बुलाते हैं।’उन्‍होंने वार्ता में बताया कि “दोनों ही सुपरमाउंटेन महाद्वीपों के निर्माण के दौरान ऊपर उठे थे “। उन्‍होंने कहा कि इन विशालकाय पहाड़ों का क्षरण पहले माइक्रोस्‍कोपिक जीवधारियों के उदय, रेडिएशन, क्‍लोरोफाइट एल्‍गी के विस्‍तार और पशुओं के जैसे विशाल जीवधारियों के उदय से जुड़ा हो सकता है।

शोधकर्ता की टीम में professor जोचेन ब्रोक्‍स ने चौकाने वाला तर्क बताया कि अब पहाड़ों के विकास के समय का पूरा रेकॉर्ड बहुत स्‍पष्‍ट हो गया है। उन्‍होंने कहना है कि यह घटना यह दो बार हो चुकी है इसमें से एक पशुओं के पैदा होने और दूसरा जटिल विशाल बड़ी कोशिकाओं से जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिकों ने कहा कि जब पहाड़ों का क्षरण हुआ तब इससे उपयोगी पोषक तत्‍व जैसे फॉस्‍फोरस और लोहा समुद्र में मिले है । यही नहीं सुपरमाउंटेन ने वातावरण में ऑक्‍सीजन के स्‍तर को बढ़ाने का काम किया जो सांस के लिए जरूरी था। झू ने कहा कि शुरुआती धरती पर वातावरण में कोई ऑक्‍सीजन नहीं मौजूद थी ।

झू ने बताया कि “दोनों बार सुपरमाउंटेन बनने और धरती के विकास में दो सबसे अहम काल के बीच संबंध है। आज के समय में ऐसे कोई सुपरमाउंटेन नहीं हैं। यह केवल उनकी ऊंचाई नहीं है बल्कि अगर आप कल्‍पना करें तो 2400 किमी लंबे हिमालय को 3 या 4 गुना बार दोहराया जाए तब उसके आकार का आपको अंदाजा लगेगा।’