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उत्तराखंड में 159 हिंदू शरणार्थियों को मिली भारत की नागरिकता, CAA का असर स्पष्ट

उत्तराखंड में 159 हिंदू शरणार्थियों को CAA के तहत भारत की नागरिकता मिली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों का सत्यापन के बाद नागरिकता।

उत्तराखंड में गृह विभाग की गहन जांच और सत्यापन के बाद पाकिस्तान से आए 153 और अफगानिस्तान से आए छह हिंदू शरणार्थियों को भारत सरकार ने नागरिकता प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस प्रकार कुल 159 शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने जा रही है।

CAA के तहत नागरिकता प्रदान

सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट 2019 (CAA) के तहत ऐसे हिंदू शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने की प्रक्रिया तेज़ हुई। गृह विभाग और उत्तराखंड सरकार ने इन आवेदनों की गहन जांच-पड़ताल के बाद इन्हें मंजूरी दी। यह कदम उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जो वर्षों से भारत में नागरिकता पाने के लिए प्रयासरत थे।

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कानून का महत्व और इतिहास

मोदी सरकार ने 2019 में संसद से CAA को पास कर भारत में शरण लेने वाले अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई लोगों के लिए नागरिकता आसान बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। इस अधिनियम के तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आए शरणार्थियों को लाभ दिया गया। उस समय विपक्ष और वामपंथी संगठनों ने इसका विरोध किया और कई स्थानों पर आंदोलन भी हुए।

सीमा जागरण मंच की भूमिका

उत्तराखंड में नागरिकों की पहचान और उनके आवेदन प्रक्रिया में सीमा जागरण मंच ने अहम भूमिका निभाई। इस संगठन ने शरणार्थियों से संवाद स्थापित कर उनके आवेदन पत्र भरवाए और गृह विभाग में दर्ज करवाए। बाद में गृह विभाग की जांच एजेंसियों ने इन आवेदनों की सत्यता की पुष्टि की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा CAA में संशोधन करके भारत में शरण लेने वाले हिंदू परिवारों की समस्याओं को दूर किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को ऐसे निर्णय के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा फैलाए गए भ्रम के बावजूद संशोधन सफल रहा और सही लोगों को लाभ मिला।

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