अदालत ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी किया, उजागर हुआ BJP का भारत के संविधान के खिलाफ षड्यंत्र। हरपाल सिंह चीमा ने लोकतंत्र की जीत पर खुशी जताई।
देश में लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत के रूप में, अदालत ने राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब इंचार्ज मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया। यह फैसला न केवल सत्य की जीत है बल्कि BJP का भारत के संविधान के खिलाफ षड्यंत्र उजागर करता है, जो कथित तौर पर देश पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए संविधान को कमजोर करने का प्रयास कर रहा था।
प्रमुख राजनीतिक नेता हरपाल सिंह चीमा ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “यह केवल केजरीवाल और सिसोदिया की जीत नहीं है, बल्कि उन सभी नागरिकों की जीत है जो संविधान में विश्वास रखते हैं। अदालत ने साफ कर दिया कि BJP का भारत के संविधान के खिलाफ षड्यंत्र असफल होगा।”
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BJP का एजेंडा: संवैधानिक सुरक्षा को कमजोर करना
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में BJP ने संविधान के नियमों और न्यायिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के कई प्रयास किए हैं। हालिया अदालत के फैसले ने इन प्रयासों को सार्वजनिक किया और यह दिखाया कि लोकतांत्रिक संस्थाएं अभी भी मजबूत हैं।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “देशवासियों ने देखा है कि सत्ता के लिए कानून को मोड़ने की कोशिशें हुई हैं। अदालत का यह निर्णय यह साबित करता है कि संविधान सर्वोपरि है और BJP का भारत के संविधान के खिलाफ षड्यंत्र कभी सफल नहीं हो सकता।”
जनता में जश्न का माहौल
पंजाब और दिल्ली के बड़े शहरों में लोग इस फैसले को लोकतंत्र की जीत के रूप में मना रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने केजरीवाल और सिसोदिया का समर्थन किया और इस अवसर पर BJP का भारत के संविधान के खिलाफ षड्यंत्र को उजागर किया।
एक नागरिक ने कहा, “यह दिन भारत के लोकतंत्र के लिए गर्व का दिन है। नेता हरपाल सिंह चीमा याद दिलाते हैं कि संविधान की रक्षा हम सभी का कर्तव्य है।”
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