राज्यदिल्ली

महिला आरक्षण बिल पर सियासी घमासान: संजय सिंह ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, उत्तर-दक्षिण विवाद भड़काने का दावा

महिला आरक्षण बिल पर सियासी घमासान, संजय सिंह ने सरकार पर उत्तर-दक्षिण विवाद भड़काने का आरोप लगाया, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल।

देश की राजनीति में एक बार फिर महिला आरक्षण बिल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संसद में हाल ही में उठे इस मुद्दे के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार देश में उत्तर और दक्षिण के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही है।

संजय सिंह का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे सरकार की रणनीति देश को बांटने की है, जबकि विपक्ष ने इस कथित कोशिश को नाकाम कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण बिल को लेकर जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई, वह कई सवाल खड़े करती है।

सरकार पर उत्तर-दक्षिण विवाद भड़काने का आरोप

एबीपी न्यूज से बातचीत में संजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार जानबूझकर देश में क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, महिला आरक्षण बिल के नाम पर नॉर्थ और साउथ इंडिया के बीच असंतोष पैदा करने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सीटों के संभावित बदलाव को लेकर पहले से ही असंतोष था, और इसी को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की जा रही थी। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम देश की एकता के खिलाफ है।

“टुकड़े-टुकड़े गैंग” शब्द पर पलटवार

भाजपा द्वारा विपक्ष को “टुकड़े-टुकड़े गैंग” कहे जाने पर संजय सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि असल में सरकार ही देश को बांटने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं थी और यह केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

संजय सिंह ने सवाल उठाया कि सीटों के परिसीमन और जनगणना के आधार पर बदलाव किस प्रक्रिया से तय किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना पारदर्शिता के ऐसे फैसले लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं हैं।

महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष का रुख

संजय सिंह ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है जब इसे तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 2023 में जो बिल पास किया था, उसमें पहले जनगणना और फिर डीलिमिटेशन की शर्त जोड़ी गई थी, जिससे इसकी प्रक्रिया लंबी हो गई।

उनका कहना है कि विपक्ष पहले ही यह मांग कर चुका था कि लोकसभा में 33% आरक्षण तत्काल लागू किया जाए, लेकिन उस समय सरकार तैयार नहीं हुई। अब एक बार फिर महिला आरक्षण बिल को लेकर वही मुद्दे सामने आ रहे हैं।

also read:- पंजाब में नशा विरोधी अभियान 2.0 की बड़ी सफलता: बलतेज पन्नू ने साझा किए रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े

सीटों के पुनर्वितरण पर सवाल

संजय सिंह ने दावा किया कि कुछ राज्यों की लोकसभा सीटें कम करने की संभावित योजना पर भी सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार, यह निर्णय जनसंख्या के पुराने आंकड़ों पर आधारित है, जो 2011 की जनगणना से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि बिना नई जातिगत जनगणना के ऐसे फैसले लेना न्यायसंगत नहीं होगा। इसी कारण महिला आरक्षण बिल को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

राजनीतिक विवाद गहराया

देश में महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे प्रक्रिया और मंशा दोनों के आधार पर सवालों के घेरे में रख रहा है।

संजय सिंह के बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक गरमा गया है और आने वाले दिनों में संसद के अंदर और बाहर इस पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

For English News: http://newz24india.in

Related Articles

Back to top button