राज्यदिल्ली

प्राइवेट स्कूल फीस में वृद्धि: माता-पिता पर बढ़ते दबाव के खिलाफ MLA सौरभ भारद्वाज ने उठाई चेतावनी

प्राइवेट स्कूलों ने माता-पिता से उच्च शुल्क वसूलना शुरू कर दिया। MLA सौरभ भारद्वाज ने तत्काल कदम उठाने की अपील की ताकि प्राइवेट स्कूल फीस में वृद्धि रोकी जा सके।

प्राइवेट स्कूलों ने फिर से माता-पिता से अत्यधिक शुल्क वसूलने की कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने नए कानून के तहत इस अत्याचार को समाप्त करने का आश्वासन दिया था, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। इस गंभीर मुद्दे पर MLA सौरभ भारद्वाज ने कड़ा विरोध व्यक्त किया है।

माता-पिता का कहना है कि स्कूल प्रबंधन उन्हें प्राइवेट स्कूल फीस में वृद्धि के तहत ब्लैकमेल कर रहा है। कई माता-पिता ने बताया कि यदि वे अधिक शुल्क नहीं देंगे तो उनके बच्चों को प्रवेश, परीक्षा या परिणाम में बाधा डाली जा रही है। MLA सौरभ भारद्वाज ने कहा, “सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए, माता-पिता को किसी भी बहाने से परेशान नहीं किया जा सकता।”

हालांकि यह मामला गंभीर है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि BJP सरकार प्राइवेट स्कूल मालिकों के पक्ष में काम कर रही है। अभी तक किसी भी स्कूल के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की उदासीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। MLA सौरभ भारद्वाज ने कहा कि नया कानून इस प्रकार की दुरुपयोग को रोकना चाहिए था, लेकिन जमीन पर वास्तविकता कुछ और ही है।

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विशेषज्ञों और माता-पिता ने बताया कि प्राइवेट स्कूल फीस में वृद्धि केवल परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं डाल रही, बल्कि शिक्षा में असमानता भी बढ़ा रही है। कई अंग्रेज़ी समाचार पत्र इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, इसलिए स्थानीय नेता MLA सौरभ भारद्वाज को जागरूकता फैलाने और प्रशासन से जवाबदेही की मांग करनी पड़ रही है।

विपक्ष और नागरिक समाज ने कड़ा कदम उठाने की अपील की है और चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आ रही है, प्राइवेट स्कूल फीस में वृद्धि की समस्या और गंभीर होती जा रही है। MLA सौरभ भारद्वाज ने दोहराया कि माता-पिता को प्राइवेट स्कूलों की लालच के शिकार नहीं बनने देना चाहिए।

इस विवाद ने अब प्रशासन पर जोर दिया है कि CM रेखा गुप्ता और आशीष सूद द्वारा किए गए आश्वासन को वास्तविकता में बदलें। यदि सरकार सक्रिय नहीं हुई, तो प्राइवेट स्कूल फीस में वृद्धि आगामी राजनीतिक बहस का मुख्य मुद्दा बनी रहेगी।

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