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मेष संक्रांति 2026: 14 या 15 अप्रैल, जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

मेष संक्रांति 2026: जानें 14 अप्रैल को शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सूर्य देव की उपासना से जुड़ी पूरी जानकारी।

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने पर मेष संक्रांति मनाई जाती है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि इसी दिन से नए सौर वर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। इस बार लोग सबसे ज्यादा यह जानना चाहते हैं कि मेष संक्रांति 2026 कब पड़ेगी 14 या 15 अप्रैल।

मेष संक्रांति 2026 की सही तारीख

पंचांग के अनुसार, मेष संक्रांति 2026 का पर्व 14 अप्रैल 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। इसी दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे और नए सौर मास की शुरुआत होगी। इसलिए इस वर्ष मेष संक्रांति 2026 का महत्व और भी बढ़ जाता है।

मेष संक्रांति 2026 का मुहूर्त

मेष संक्रांति 2026 के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

संक्रांति का क्षण: 09:39 AM
पुण्य काल: 05:57 AM से 01:55 PM
महा पुण्य काल: 07:30 AM से 11:47 AM

इन समयों में किए गए स्नान, दान और पूजा का विशेष फल मिलता है। इसलिए मेष संक्रांति 2026 के दौरान इन मुहूर्तों का पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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मेष संक्रांति 2026 की पूजा विधि

मेष संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। जल में लाल फूल, चावल और कुमकुम मिलाना शुभ माना जाता है।

सूर्य देव को अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करने के साथ-साथ दान करना भी शुभ होता है। मेष संक्रांति पर जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करना पुण्यकारी माना जाता है।

मेष संक्रांति का महत्व

मेष संक्रांति को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है जैसे सतुआन, पणा संक्रांति, पुथन्डु, विषु, बिहू और बैसाखी। यह पर्व भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।

इस दिन स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि मेष संक्रांति पर किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं।

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