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हरियाणा विधानसभा: नारी शक्ति वंदन विधेयक पर श्रुति चौधरी का बड़ा बयान, बताया इसे महिला सशक्तिकरण का नया युग

हरियाणा की मंत्री श्रुति चौधरी ने विधानसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक को ऐतिहासिक बताया। जानें कैसे 33% महिला आरक्षण से देश की राजनीति और समाज बदलेगा।

हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान प्रदेश की राजनीति में महिला नेतृत्व को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा देखने को मिली। सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने सदन में नारी शक्ति वंदन विधेयक को लेकर अपनी राय रखते हुए इसे राष्ट्र निर्माण के लिए एक ऐतिहासिक कदम करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय महिलाओं के गौरव और अधिकार की गूँज है।

राजनीति से ऊपर है नारी शक्ति वंदन विधेयक: श्रुति चौधरी

सदन को संबोधित करते हुए श्रुति चौधरी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन विधेयक कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं था, बल्कि यह पूरी दुनिया को एक कड़ा संदेश देने का मौका था। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब अपनी ‘मातृ शक्ति’ को केवल घरों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उन्हें नेतृत्व की अगली पंक्ति में लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने अपने संबोधन में कहा:

“यदि नारी शक्ति वंदन विधेयक पूरी तरह लागू होता है, तो यह हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण विधायी निर्णयों में से एक गिना जाएगा। यह देश की आधी आबादी के सपनों को नई उड़ान देने वाला फैसला है।”

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33 प्रतिशत आरक्षण से बदलेगी देश की तस्वीर

श्रुति चौधरी ने विश्वास जताया कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को मिलने वाला 33 प्रतिशत आरक्षण केवल राजनीतिक संख्या बल तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन विधेयक के पारित होने से न केवल राजनीति की दिशा बदलेगी, बल्कि समाज के हर वर्ग में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन आएगा। जब नीति निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, तो जमीनी स्तर की समस्याओं का समाधान और अधिक संवेदनशीलता से होगा।

नेतृत्व में मातृ शक्ति की प्रतिबद्धता

मंत्री ने सदन में दोहराया कि नारी शक्ति वंदन विधेयक भारत की उस सोच का प्रतीक है जहाँ महिलाओं को नेतृत्व के समान अवसर दिए जाने की बात कही गई है। उन्होंने विपक्ष और समाज के सभी वर्गों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की, ताकि देश की मातृ शक्ति को उनका वाजिब हक मिल सके।

इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन विधेयक पर दिया गया यह बयान अब प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह विधेयक हरियाणा की राजनीति और समाज में महिलाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

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