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आध्यात्मिक विरासत और विकास का संगम: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सांस्कृतिक संरक्षण पर दिया बड़ा बयान

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। जानें कैसे राज्य सरकार तीर्थ स्थलों और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों को मजबूत करने के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिकता और विज्ञान की दौड़ में आगे बढ़ते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री के अनुसार, हरियाणा की पहचान उसके तीर्थ स्थलों और गौरवशाली इतिहास से है, जिसे संजोना उनकी सरकार की प्राथमिकता है।

तीर्थ स्थलों और धार्मिक पर्यटन पर नायब सिंह सैनी का जोर

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का लक्ष्य न केवल मंदिरों और सरोवरों का जीर्णोद्धार करना है, बल्कि राज्य को धार्मिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना भी है।

नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में, कुरुक्षेत्र के 48 कोस के तीर्थ स्थलों से लेकर आदि बद्री और ढोसी की पहाड़ियों जैसे ऐतिहासिक स्थानों के विकास के लिए विशेष बजट और योजनाएं तैयार की गई हैं।

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आधुनिकता और विज्ञान के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव

विकास की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया। उन्होंने कहा:

“भारत को आधुनिकता, विज्ञान और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहना होगा। विरासत के बिना विकास अधूरा है, और हमारी सरकार इसी संतुलन को बनाए रखने का प्रयास कर रही है।”

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्वास जताया कि जब युवा पीढ़ी अपनी परंपराओं और मूल्यों का सम्मान करेगी, तभी देश का सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा।

संरक्षण के लिए चलाई जा रही हैं अनेक योजनाएं

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि तीर्थ स्थलों के विकास और मंदिरों के संरक्षण के लिए कई सरकारी योजनाएं धरातल पर उतारी जा रही हैं। इसमें सरोवरों की सफाई, प्राचीन संरचनाओं का रखरखाव और तीर्थयात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विस्तार शामिल है। नायब सिंह सैनी ने बताया कि इन प्रयासों से न केवल संस्कृति सुरक्षित होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

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