राज्यपंजाब

आर्मी स्कूलों में पंजाबी को वैकल्पिक बनाने पर भड़के बलतेज पन्नू, भाजपा पर साधा तीखा निशाना

आर्मी स्कूलों में पंजाबी को वैकल्पिक करने पर भड़के बलतेज पन्नू। भाजपा पर बोला तीखा हमला और कहा- पंजाबी मां बोली का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा पंजाब। पूरी खबर पढ़ें।

पंजाब की सियासत में एक बार फिर भाषा को लेकर विवाद गर्मा गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और चर्चित चेहरा बलतेज पन्नू ने पंजाब के आर्मी स्कूलों में पंजाबी भाषा को वैकल्पिक (Optional) किए जाने के फैसले पर केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस कदम को सीधे तौर पर पंजाब की संस्कृति और मातृभाषा का अपमान करार दिया है।

संस्कृत अनिवार्य और पंजाबी वैकल्पिक: क्या है पूरा विवाद?

हाल ही में पंजाब स्थित आर्मी स्कूलों से जुड़ी यह खबर सामने आई है कि वहां संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि मातृभाषा पंजाबी को केवल एक वैकल्पिक विषय के रूप में रखा गया है। इस फैसले की जानकारी मिलते ही पंजाब के बुद्धिजीवियों और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

बलतेज पन्नू ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे ‘पंजाब विरोधी’ मानसिकता का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती पर स्थित स्कूलों में पंजाबी को दूसरे दर्जे पर रखना तर्कसंगत नहीं है।

also read:- पंजाब की अमन-शांति, भाईचारक सांझ को भंग करने की इजाजत नहीं दी जा सकती, फूट डालने वाली ताकतें पंजाब में कभी सफल नहीं होंगी: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

“भाजपा के फैसले हमेशा पंजाब विरोधी रहे हैं” – बलतेज पन्नू

अपने बयान में बलतेज पन्नू ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा का इतिहास हमेशा से पंजाब के हितों के खिलाफ रहा है। उन्होंने कहा: “भाजपा सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है जिससे पंजाब की अस्मिता को ठेस पहुंचे। आर्मी स्कूलों में पंजाबी को दरकिनार कर संस्कृत को थोपना पंजाबियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। आम आदमी पार्टी इस तानाशाही फरमान की पुरजोर निंदा करती है।”

मां बोली का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा पंजाब

बलतेज पन्नू ने चेतावनी देते हुए कहा कि पंजाबी अपनी ‘मां बोली’ (मातृभाषा) के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब की मिट्टी पर पंजाबी भाषा को गौण करने का कोई भी प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा। पन्नू के अनुसार, भाजपा का यह नया फरमान न केवल शिक्षा विरोधी है, बल्कि यह संघीय ढांचे पर भी प्रहार है।

For English News: http://newz24india.in

Related Articles

Back to top button