PM मोदी की ‘7 स्टेप’ अपील पर अरविंद केजरीवाल ने उठाए सवाल। क्या देश में आर्थिक इमरजेंसी जैसे हालात हैं? जानें केजरीवाल की 3 मांगें और अर्थव्यवस्था पर चिंता।
देश की गिरती अर्थव्यवस्था और वैश्विक परिस्थितियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई ‘7 प्रतिज्ञाओं’ की अपील ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री की इस तरह की ‘कठोर अपील’ से देश में आर्थिक इमरजेंसी (Economic Emergency) जैसा संदेह पैदा हो रहा है। केजरीवाल ने साफ किया कि देशहित में हर कठिनाई झेलने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने पीएम के सामने अपनी 3 प्रमुख मांगें भी रखी हैं।
PM मोदी की 7 अपील और केजरीवाल की चिंता
हाल ही में पीएम मोदी ने देशवासियों से विदेशी सामान का बहिष्कार, सोने की खरीद बंद करने, तेल बचाने, वर्क फ्रॉम होम (WFH) अपनाने और विदेश यात्रा टालने जैसे 7 कड़े कदम उठाने का आग्रह किया था। इस पर केजरीवाल ने कहा, “1950 के बाद से देश ने कई युद्ध और आर्थिक मंदी देखी, लेकिन किसी भी प्रधानमंत्री ने जनता से इतने कठोर त्याग की मांग नहीं की थी। यहाँ तक कि लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी की अपीलों में भी इतनी पाबंदियां नहीं थीं।”
देश की आर्थिक स्थिति का सच देश के सामने रखे मोदी सरकार | महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता | LIVE https://t.co/JeFpy16wun
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) May 12, 2026
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अरविंद केजरीवाल की 3 मुख्य मांगें
केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए केंद्र सरकार से निम्नलिखित तीन सवालों के जवाब मांगे हैं:
अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति बताएं: केजरीवाल का कहना है कि अगर हालात इतने खराब हैं कि नागरिकों को खाना-पीना और घूमना कम करना पड़ रहा है, तो सरकार को श्वेत पत्र जारी कर बताना चाहिए कि आज देश की आर्थिक इमरजेंसी जैसी स्थिति क्यों बनी है? जनता को सच जानने का हक है।
सिर्फ युद्ध ही कारण क्यों?: उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका-इरान युद्ध ही मुख्य वजह है, तो दुनिया के किसी अन्य देश ने ऐसी कठोर अपील क्यों नहीं की? क्या यह संकट केवल युद्ध की वजह से है या हमारी आंतरिक नीतियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं?
मिडल क्लास पर ही बोझ क्यों?: केजरीवाल ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या देशभक्ति का सारा ठेका मध्यम वर्ग ने ले रखा है? सरकार खुद अपने खर्चों, मंत्रियों की विदेश यात्राओं और वीआईपी खर्चों में कटौती क्यों नहीं कर रही है?
क्या देश बड़े संकट की ओर है?
अरविंद केजरीवाल का दावा है कि प्रधानमंत्री की बातों से ऐसा लग रहा है जैसे देश एक गहरी आर्थिक इमरजेंसी के मुहाने पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि मिडिल क्लास हमेशा देश के लिए कुर्बानी देता है, लेकिन इस बार सरकार को भी उदाहरण पेश करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाया है। हालांकि, केजरीवाल के इन सवालों ने अब इस मुद्दे को पूरी तरह से राजनीतिक बना दिया है। क्या वाकई देश में आर्थिक इमरजेंसी जैसे हालात हैं या यह महज एक एहतियाती कदम है, इस पर अब सबकी नजरें केंद्र के अगले रुख पर टिकी हैं।
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