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यमुना सफाई: 6 राज्यों के साथ किशाऊ परियोजना पर समझौता, अमित शाह ने बताया लक्ष्य

अमित शाह ने कहा कि 2029 तक यमुना को साफ करने का लक्ष्य है। छह राज्यों के साथ किशाऊ परियोजना समझौते से जल प्रबंधन को गति मिलने की उम्मीद है।

यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में केंद्र सरकार ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर छह राज्यों के साथ अहम समझौता किया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने 15 सितंबर 2026 को किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए।

बैठक के दौरान अमित शाह ने यमुना सफाई 2029 के लक्ष्य को लेकर कहा कि सरकार 2029 तक साफ यमुना का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने यमुना की सफाई को गंगा के पुनर्जीवन से भी जोड़ा और कहा कि यमुना के स्वच्छ होने का असर गंगा पर भी पड़ेगा।

किशाऊ परियोजना को मिला राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा

केंद्र सरकार ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक परियोजना की वित्तीय लागत में करीब 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत भार संबंधित राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा।

इस परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाए जाने की योजना है। परियोजना में करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल भंडारण की क्षमता होगी।

छह राज्यों के लिए महत्वपूर्ण समझौता

किशाऊ परियोजना से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को अलग-अलग स्तर पर लाभ मिलने की बात सरकार ने कही है। परियोजना के तहत करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का प्रावधान बताया गया है।

अमित शाह ने समझौते को परियोजना को अंतिम चरण तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। यमुना सफाई 2029 के लक्ष्य के संदर्भ में यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जून 2026 की सरकारी बैठक में किशाऊ परियोजना को यमुना के पुनर्जीवन और नदी में स्वच्छ जल के प्रवाह से जोड़ा गया था।

कौन-कौन से मुख्यमंत्री रहे मौजूद?

समझौते पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हस्ताक्षर किए। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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यमुना से लेकर पानी की जरूरतों तक परियोजना का उद्देश्य

किशाऊ परियोजना का उद्देश्य सिर्फ यमुना से जुड़े जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इससे सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत से जुड़े लाभ भी प्रस्तावित हैं। जून में हुई बैठक में हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने तथा परियोजना के पावर कंपोनेंट की लागत से जुड़े प्रावधानों पर भी सहमति बनी थी।

दिल्ली में यमुना पुनर्जीवन को लेकर केंद्र पहले भी समीक्षा बैठकें कर चुका है। जून 2026 की एक समीक्षा में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, औद्योगिक अपशिष्ट और नालों से होने वाले डिस्चार्ज की निगरानी तथा यमुना से जुड़े प्रोजेक्ट्स की नियमित समीक्षा पर जोर दिया गया था।

2029 तक यमुना साफ करने का लक्ष्य

बैठक में अमित शाह ने यमुना सफाई 2029 को लेकर सरकार के लक्ष्य का उल्लेख किया। हालांकि 2029 की समयसीमा एक सरकारी लक्ष्य के रूप में बताई गई है; इसे यमुना के पूरी तरह साफ होने की स्वतंत्र रूप से सत्यापित अंतिम तारीख के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

यमुना सफाई 2029 के लक्ष्य के साथ केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें नदी के पानी, सीवेज प्रबंधन और जल संसाधनों से जुड़े अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। किशाऊ समझौते को इसी व्यापक जल प्रबंधन और यमुना पुनर्जीवन प्रयास का एक हिस्सा बताया गया है।

अब छह राज्यों की सहमति के बाद किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। परियोजना के जरिए जल भंडारण, सिंचाई और बिजली उत्पादन के साथ यमुना बेसिन में जल उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

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