जितिया व्रत 2026: पारण का सही समय, विधि और जरूरी नियम
जितिया व्रत 2026 का पारण 4 अक्टूबर को सुबह 7:28 बजे के बाद होगा। जानें व्रत खोलने का सही समय, विधि और जरूरी नियम।
जितिया व्रत माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से महिलाएं यह कठिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस साल जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जा रहा है, जबकि इसका पारण अगले दिन यानी 4 अक्टूबर को किया जाएगा।
इस व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और आसपास के कई क्षेत्रों में इसे श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, विधि-विधान और निर्धारित समय के अनुसार जितिया व्रत का पारण करने से व्रत का धार्मिक महत्व पूरा होता है।
जितिया व्रत 2026 का पारण कब होगा?
पंचांग के अनुसार, इस साल जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को किया जाएगा। व्रत खोलने का समय सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद बताया गया है।
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व्रती महिलाएं निर्धारित समय के बाद जल और अन्न ग्रहण करके अपना उपवास समाप्त कर सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारण के लिए सही तिथि और समय का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।
जितिया व्रत पारण की विधि
पारण के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा की तैयारी करें और भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इसके लिए तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें लाल फूल और अक्षत डाल सकते हैं।
इसके बाद पूजा स्थल पर दीपक और धूप जलाकर भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करें। परंपरा के अनुसार चील और सियारिन का भी ध्यान किया जाता है और उन्हें जल व प्रसाद अर्पित किया जाता है।
पूजा पूरी होने के बाद सबसे पहले प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें। इसके बाद भगवान को अर्पित किए गए प्रसाद और जल को ग्रहण करके व्रत खोलें। पारण के बाद सात्विक भोजन करना उचित माना जाता है।
पारण के दिन क्या खाना चाहिए?
परंपराओं के अनुसार, जितिया व्रत के पारण के दिन कुछ विशेष व्यंजनों का सेवन किया जाता है। इनमें नोनी का साग और झिंगनी यानी तोरी की सब्जी का विशेष उल्लेख मिलता है।
पारण के बाद भोजन हल्का और सात्विक रखना चाहिए। भोजन में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल न करने की परंपरा भी कई परिवारों में मानी जाती है।
जितिया व्रत पारण के जरूरी नियम
जितिया व्रत के पारण को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। पारण के दिन भोजन करने से पहले जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को अन्न, भोजन, धन या अनाज का दान करना शुभ माना जाता है।
इसके अलावा, व्रत का पारण अष्टमी तिथि में नहीं किया जाता। इस साल व्रती महिलाओं को 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 7:28 बजे के बाद ही व्रत खोलने की बात कही गई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्धारित समय पर पूजा और पारण करने से व्रत की परंपरा पूरी होती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में जितिया की पूजा एवं पारण की विधि में कुछ स्थानीय अंतर हो सकते हैं। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग और पारिवारिक परंपरा का भी ध्यान रखना चाहिए।
संतान की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है व्रत
जितिया व्रत मातृत्व, त्याग और संतान के प्रति प्रेम से जुड़ा पर्व है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना के साथ यह उपवास रखती हैं। व्रत के बाद विधि-विधान से पारण करना इसकी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
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