धर्म

गुरु प्रदोष 2026: शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 5 चीजें, जानें पूजा मुहूर्त और महत्व

गुरु प्रदोष 8 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। जानें शिवलिंग पर कौन सी 5 चीजें चढ़ाएं और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ती है तो इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

अक्टूबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन भक्त उपवास रखने के साथ शिवलिंग का अभिषेक और पूजन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु प्रदोष पर शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है।

गुरु प्रदोष पर शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 5 चीजें

1. बेलपत्र

भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना जाता है। गुरु प्रदोष के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।

2. पीला चंदन

इस दिन शिवलिंग पर पीला चंदन अर्पित करने की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार, शिवलिंग पर आठ स्थानों पर पीला चंदन लगाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इसे पूजा में शुभता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।

3. शहद

प्रदोष पूजा के दौरान शिवलिंग पर शहद चढ़ाना भी शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को शहद अर्पित करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

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4. कच्चा दूध

भगवान शिव के अभिषेक में दूध का विशेष महत्व माना जाता है। गुरु प्रदोष के दिन शिवलिंग पर कच्चे दूध से अभिषेक करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

5. पंचामृत

पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करना भी प्रदोष पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसे दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल को मिलाकर तैयार किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पंचामृत से अभिषेक करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

गुरु प्रदोष 2026 का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होगी और 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी।

8 अक्टूबर को गुरु प्रदोष की पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक बताया गया है। भक्त इस अवधि में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं।

गुरु प्रदोष व्रत का क्या है महत्व?

जब प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ता है, तब इसे गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान शिव की आराधना के साथ बृहस्पति देव की कृपा भी प्राप्त होने की मान्यता है।

गुरु प्रदोष का व्रत ज्ञान, शिक्षा, धन, धर्म और सुख-समृद्धि से जुड़ा माना जाता है। विवाह, संतान, गुरु, पिता और बड़े भाई जैसे विषयों में भी बृहस्पति को महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। यही वजह है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजन विद्यार्थियों तथा आध्यात्मिक साधना करने वाले लोगों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत श्रद्धा और विधि-विधान से करने से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है। हालांकि पूजा से जुड़े फल आस्था और धार्मिक विश्वास पर आधारित हैं।

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