अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर AAP नेता गोपाल राय के सवाल, किसानों और देश की स्वतंत्रता पर उठाया बड़ा मुद्दा

AAP नेता गोपाल राय ने अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील पर उठाए सवाल, किसानों और भारत की स्वायत्तता पर जताई चिंता। क्या यह समझौता देश के लिए खतरनाक साबित होगा?

अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर दिल्ली के पूर्व कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के गुजरात प्रभारी गोपाल राय ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। राय का कहना है कि भारत सरकार ने यह ट्रेड डील बिना स्पष्ट जवाब और रणनीति के अमेरिका के दबाव में की है, जो देश के भविष्य और किसानों के हितों के लिए खतरा बन सकती है।

गोपाल राय ने कहा कि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 3% से बढ़ाकर 18% कर दिया है, जबकि भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ 0% कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रूस से सस्ता क्रूड ऑइल उपलब्ध है, तो महंगे तेल के लिए अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदारी क्यों की जा रही है।

राय ने यह भी कहा कि इस समझौते में भारत अपना कृषि क्षेत्र पहली बार अमेरिका के लिए खोल रहा है, जो किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक कदम हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ और निगरानी की शर्तें देश की स्वायत्तता और स्वतंत्र निर्णय क्षमता पर सवाल उठाती हैं।

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इतिहास से जोड़ते हुए, गोपाल राय ने ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश शासन का उदाहरण दिया, जब व्यापार के बहाने भारत को धीरे-धीरे गुलामी की ओर धकेला गया। उन्होंने चेतावनी दी कि आज यदि भारत अमेरिका के दबाव में यह समझौता करता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा बन सकता है।

AAP नेता ने सरकार और भारतीय जनता से अपील की कि इस समझौते पर ठंडे दिमाग से विचार किया जाए। राय का कहना है कि यह निर्णय केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश के भविष्य और स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण है।

गोपाल राय ने आगे कहा कि केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं को अपनी अंतरात्मा से सवाल पूछना चाहिए कि क्या स्वार्थ के लिए देश के किसानों, युवाओं और आम जनता को खतरे में डालना उचित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता देश के लिए एक नया, खतरनाक इतिहास बना सकता है और आने वाली पीढ़ियों को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

इस पूरे मसले पर देशभर में चर्चा जारी है और विपक्ष ने सरकार से इस ट्रेड डील के सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने और स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।

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