अरविंद केजरीवाल ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। मनीष सिसोदिया के साथ बापू को किया नमन। पढ़ें पूरी खबर।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आज राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आबकारी नीति मामले में जारी कानूनी विवाद और अदालती कार्यवाही के बहिष्कार के बीच अरविंद केजरीवाल का यह दौरा राजनीतिक और प्रतीकात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी भी मौजूद रहीं।
सत्याग्रह और संघर्ष का नया संकल्प
राजघाट पर बापू की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से बात करते हुए न्यायपालिका के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय प्रणाली के कारण ही वे आज स्वतंत्र हैं, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों के चलते उन्हें ‘सत्याग्रह’ का मार्ग अपनाना पड़ रहा है। अरविंद केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि वे सत्य और अहिंसा के गांधीवादी सिद्धांतों पर अडिग रहेंगे।
आज मनीष जी और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुँच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया।
मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए ‘सत्याग्रह’ के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें।
मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से, सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम… pic.twitter.com/5IvQGmFQXl
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) April 28, 2026
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अदालती बहिष्कार और बापू की शरण
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अरविंद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सुनवाई का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। उन्होंने अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मौजूदा हालात में उन्हें वहां से न्याय की उम्मीद नहीं है। इसी विरोध को उन्होंने ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया है और बापू के चरणों में नमन कर इस कठिन पथ पर चलने की शक्ति मांगी है।
मनीष सिसोदिया और आतिशी भी रहे मौजूद
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान अरविंद केजरीवाल के साथ मनीष सिसोदिया ने भी बापू को नमन किया। सिसोदिया ने भी हाल ही में इसी अदालत की कार्यवाही से खुद को अलग करने का फैसला किया है। राजघाट पर “सत्यमेव जयते” के नारों के बीच पूरी पार्टी ने एकजुटता का संदेश दिया और संकल्प लिया कि वे भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ अपनी लड़ाई शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखेंगे।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई और ईडी की जांच के बीच, फरवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया को बरी कर दिया था। हालांकि, जांच एजेंसियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसी अपील पर सुनवाई करने वाली बेंच के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने मोर्चा खोलते हुए अब सत्याग्रह का रास्ता चुना है।
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