PhoolDei Festival 2026: उत्तराखंड का रंग-बिरंगा और पवित्र फूलदेई पर्व कब है?
PhoolDei Festival 2026 उत्तराखंड में 15 मार्च को मनाया जाएगा। बच्चों द्वारा फूल चढ़ाने की परंपरा और प्राकृतिक नवजीवन का अद्भुत संगम।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर में कई ऐसे त्योहार शामिल हैं जो प्रकृति और लोकजीवन से गहराई से जुड़े हुए हैं। इनमें सबसे खूबसूरत और खास पर्व है PhoolDei Festival 2026। इसे उत्तराखंड में बच्चों का पर्व माना जाता है और पूरे राज्य में बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
PhoolDei Festival 2026 की तारीख
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, PhoolDei Festival 2026 चैत्र संक्रांति के दिन मनाया जाता है। इस साल मीन संक्रांति 15 मार्च 2026 को पड़ रही है। इसलिए पारंपरिक रूप से पूरे उत्तराखंड में PhoolDei Festival 2026 का आयोजन 15 मार्च को किया जाएगा। हालांकि, कुछ स्थानों पर पंचांग के अंतर के कारण लोग 14 मार्च को भी तैयारी करते हैं।
उत्तराखंड में PhoolDei Festival 2026 की खासियत
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सौर पंचांग का उपयोग किया जाता है। नववर्ष की शुरुआत यहां फूलदेई से मानी जाती है। यह समय प्रकृति के सबसे सुंदर रूप का होता है। पहाड़ों में चारों ओर हरियाली फैल जाती है, पेड़ों पर नए पत्ते और रंग-बिरंगे फूल खिलने लगते हैं। यही प्राकृतिक नवजीवन PhoolDei Festival 2026 का प्रतीक बनता है।
बच्चों का पर्व
PhoolDei Festival 2026 खासतौर पर बच्चों का त्योहार माना जाता है। इस दिन बच्चे सुबह जल्दी उठकर जंगलों और बगीचों से ताजे फूल लाते हैं। इसके बाद वे गांव के घर-घर की देहरी पर फूल चढ़ाते हैं और पारंपरिक लोकगीत गाते हैं। इस दौरान बच्चे कहते हैं – “फूल देई, छम्मा देई, देणी द्वार भर भकार।” इसका अर्थ है कि घर में खुशहाली, समृद्धि और अन्न-धान्य की भरपूरता बनी रहे।
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देहरी पर फूल चढ़ाने की परंपरा
मान्यता है कि बच्चों को देवस्वरूप माना जाता है। इसलिए जब वे घर की देहरी पर फूल चढ़ाते हैं, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। घर के लोग बदले में बच्चों को चावल, गुड़, मिठाई या पैसे देकर आशीर्वाद देते हैं। इस तरह PhoolDei Festival 2026 में बच्चों में खुशी और उत्साह और भी बढ़ जाता है।
प्रकृति, संस्कृति और लोकजीवन का संगम
दुनिया के अधिकांश समुदाय नववर्ष का स्वागत अलग-अलग तरीके से करते हैं। उत्तराखंड में बच्चों द्वारा फूल चढ़ाकर नववर्ष का स्वागत करना एक अद्वितीय परंपरा है। यही वजह है कि PhoolDei Festival 2026 को प्रकृति, संस्कृति और लोकजीवन का अनोखा संगम माना जाता है।
इस तरह, PhoolDei Festival 2026 न केवल बच्चों और प्रकृति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को भी जीवित रखता है।
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