राज्यगुजरात

नेशनल हीरो सोनम वांगचुक और देश के विद्यार्थियों के समर्थन में ‘आप’ नेता डॉ. कायनात अंसारी आथा 3 घंटे के मौन धरने पर

AAP नेता डॉ. कायनात अंसारी आथा ने सोनम वांगचुक और छात्रों के समर्थन में 3 घंटे का मौन धरना दिया, शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर सवाल उठाए।

पेपर लीक के कारण 30 मासूम बच्चों ने आत्महत्या कर ली, सरकार इन माता-पिता की पीड़ा क्यों नहीं समझती?: डॉ. कायनात अंसारी आथा AAP

व्यवस्था परिवर्तन के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा जरूरी, धर्म और जाति की राजनीति से ऊपर उठना होगा: डॉ. कायनात अंसारी आथा AAP

कांग्रेस शासन में अन्ना हज़ारे के आंदोलन का समर्थन करने वाली भाजपा की संवेदनशीलता सत्ता में आते ही क्यों मर गई?: डॉ. कायनात अंसारी आथा AAP

किसी भी नेता का पद या अहंकार देश के बच्चों और सोनम वांगचुक के जीवन से बड़ा नहीं हो सकता: डॉ. कायनात अंसारी आथा AAP

यह देश हमारा है और व्यवस्था बदलने की जिम्मेदारी भी हमारी है, सोनम वांगचुक के शिक्षा आंदोलन को समर्थन देने की सार्वजनिक अपील: डॉ. कायनात अंसारी आथा AAP

आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. कायनात अंसारी आथा ने लाइव माध्यम से कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक के समर्थन में हमने 3 घंटे के मौन धरने का आयोजन किया है। सोनम वांगचुक के अपने बच्चे NEET की परीक्षा नहीं दे रहे हैं, फिर भी वे हमारे बच्चों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए पिछले 15 दिनों से भूखे रहकर संघर्ष कर रहे हैं, जिसके कारण उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ गया है। जिस व्यक्ति ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाकर पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया, उसकी बात सुनने के बजाय सरकार अहंकार में आकर उसकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। बार-बार हो रहे पेपर लीक से परेशान होकर लगभग 30 विद्यार्थियों ने आत्महत्या कर ली है, उन माता-पिता की पीड़ा की कल्पना भी करना मुश्किल है। ये किसी और के बच्चे नहीं, बल्कि हमारे अपने बच्चे हैं, यह समझकर हमें जागरूक होना होगा। यदि शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में पेपर लीक हो रहे हैं, तो उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि किसी का भी पद किसी बच्चे के जीवन से बड़ा नहीं हो सकता।

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‘आप’ नेता डॉ. कायनात अंसारी आथा ने आगे कहा कि पहले जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और अन्ना हज़ारे आंदोलन पर बैठे थे, तब यही भाजपा के नेता कहते थे कि सरकार को जनता की आवाज सुननी चाहिए। लेकिन आज सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार की आंदोलनों के प्रति संवेदनशीलता पूरी तरह खत्म हो गई है और वे लोकतंत्र की जगह तानाशाही चला रहे हैं। हमें धर्म और जाति की राजनीति में उलझाकर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है, लेकिन हमारे लिए देश किसी भी नेता या व्यक्ति से कहीं बड़ा है। वर्षों बाद देश में ऐसी क्रांति आई है जो सब कुछ बदल देगी और हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करेगी। मैं देश के सभी नागरिकों से अपील करती हूं कि आप जहां भी हों, वहीं से इस शिक्षा बचाओ आंदोलन का पूरा समर्थन करें और इस देश की व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी अपनी समझकर आगे आएं।

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