डॉ. सुमिता मिश्रा ने हरियाणा के सरकारी मेडिकल संस्थानों में पानी के टैंकों की सफाई के सख्त निर्देश दिए। सुरक्षित पेयजल के लिए ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति लागू की गई।
हरियाणा सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आयुष और चिकित्सा शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के सभी सरकारी मेडिकल संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर के सभी चिकित्सा संस्थानों में स्थित पानी के टैंकों की तत्काल जाँच की जाए और उनकी गहन सफ़ाई सुनिश्चित की जाए। उनका यह कदम मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
स्वच्छ पेयजल के लिए ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने अपने आदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि सुरक्षित पानी की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि पेयजल स्वच्छता के मानकों में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ विभाग ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगा।
अस्पतालों में आने वाले मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कम होती है, ऐसे में दूषित पानी संक्रमण के खतरे को कई गुना बढ़ा सकता है। इसी गंभीरता को समझते हुए डॉ. सुमिता मिश्रा ने जल भंडारण प्रणालियों की नियमित निगरानी करने को कहा है।
डॉ. सुमिता मिश्रा के निर्देशों की मुख्य बातें:
तत्काल जाँच: सभी मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी के टैंकों की स्थिति की तुरंत रिपोर्ट तैयार की जाए।
नियमित सफाई: टैंकों की सफाई का एक निश्चित शेड्यूल बनाया जाए और उसका कड़ाई से पालन हो।
लॉग बुक संधारण: सफाई की प्रक्रिया के बाद उसकी तारीख और विवरण लॉग बुक में दर्ज किया जाना अनिवार्य होगा।
गुणवत्ता परीक्षण: सफाई के बाद पानी के नमूनों की लैब टेस्टिंग कराई जाए ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा सर्वोपरि
डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, एक आदर्श स्वास्थ्य केंद्र वही है जहाँ उपचार के साथ-साथ स्वच्छता और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी विश्व स्तरीय हों। उन्होंने सभी जिला चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) और मेडिकल कॉलेजों के कुलपतियों को इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि मानसून आने से पहले और गर्मी के इस मौसम में जल जनित बीमारियों (Water-borne diseases) जैसे हैजा, टाइफाइड और डायरिया को फैलने से रोका जा सके। डॉ. सुमिता मिश्रा का यह सख्त रुख स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी लाने के संकेत दे रहा है।
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